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डेटा लीक से लेकर कारोबार ठप होने तक का खतरा, एआई युग में साइबर सुरक्षा जरूरी

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। एक साइबर हमले की वजह से पूरी फैक्ट्री बंद हो सकती है, जिससे सामान समय पर नहीं पहुँच पाता और कंपनी पर भारी जुर्माना लग जाता है। एक सिस्टम हैक होने के कारण सैकड़ों ट्रक रास्ते में ही खड़े हो जाते हैं और पूरी सप्लाई चेन ठप हो जाती है। वहीं, एक कर्मचारी अनजाने में ग्राहक के सीक्रेट डॉक्युमेंट्स किसी पब्लिक एआई टूल पर अपलोड कर देता है, जिससे कंपनी की गोपनीय जानकारी लीक हो जाती है। इन्हीं गंभीर खतरों को देखते हुए, इस साइबर जागरूकता महीने के मौके पर, टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस लखनऊ के कारोबारियों और कंपनियों से अपील कर रहा है कि वे समय रहते यह जांच लें कि वे ऐसे खतरों से निपटने के लिए कितने तैयार हैं। 

टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस ने भारतीय कंपनियों से अपने साइबर इंश्योरेंस कवर को और मजबूत करने की अपील की है। कंपनी का कहना है कि आज के दौर में साइबर हमले, एआई से जुड़े नए जोखिम और सरकारी नियम-कायदे लगातार कड़े होते जा रहे हैं। ऐसे में कंपनियों को अब साइबर खतरों को किसी छोटी-मोटी समस्या के बजाय बिजनेस के एक बड़े और मुख्य जोखिम के रूप में देखना चाहिए—ठीक वैसे ही जैसे वे वित्तीय घाटे या प्राकृतिक आपदाओं को गंभीरता से लेती हैं।

भारत के नए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून और दुनिया भर में कड़े होते प्राइवेसी नियमों के बाद, अब कंपनियाँ अपनी जिम्मेदारियों को लेकर काफी सतर्क हो रही हैं। खासकर बैंकिंग, इंश्योरेंस और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में यह चिंता सबसे ज्यादा है। इसकी वजह यह है कि ये कंपनियाँ ग्राहकों की बेहद निजी और संवेदनशील जानकारियों को संभालती हैं। ऐसे में साइबर हमलों से निपटने की उनकी तैयारी और किसी भी गड़बड़ी पर होने वाले भारी कानूनी व वित्तीय नुकसान को लेकर उनकी चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।

टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस के नेशनल हेड (लायबिलिटी लाइन्स) नज्म बिलग्रामी ने कहा, “आज एआई से जुड़े जोखिम ठीक उसी मोड़ पर हैं, जहाँ एक दशक पहले साइबर जोखिम थे। शुरुआत में साइबर इंश्योरेंस सामान्य टेक्नोलॉजी पॉलिसियों का एक छोटा सा हिस्सा हुआ करता था, लेकिन आज यह अपने आप में एक अलग और बड़ी कैटगरी बन चुका है। एआई जोखिम भी अब इसी रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं।”

उन्होंने आगाह करते हुए कहा, “कंपनियों को यह मानकर नहीं बैठना चाहिए कि एआई के कारण होने वाले नुकसान उनकी मौजूदा पॉलिसियों में अपने आप कवर हो जाएंगे। उन्हें अपने बिजनेस से जुड़े एआई के खतरों को समझना चाहिए और अपने इंश्योरेंस पार्टनर या ब्रोकर से सीधे बात करनी चाहिए कि वे इस सुरक्षा चक्र में कहाँ खड़े हैं।”

एक तरफ जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से साइबर हमलावरों के हाथ में ज्यादा आधुनिक और खतरनाक हथियार आ गए हैं, वहीं दूसरी तरफ टेक्नोलॉजी सेक्टर में अंडरराइटर्स को आशंका है कि कंपनियों में एआई के बढ़ते इस्तेमाल से आने वाले समय में प्रोफेशनल इंडेमनिटी क्लेम्स की एक बड़ी बाढ़ आ सकती है। वहीं, जब बात डायरेक्टर्स एंड ऑफिसर्स लायबिलिटी की आती है, तो बाज़ार में अभी से ही एआई को लेकर झूठे वादे करना, एआई में किया गया निवेश डूबना और एआई सिस्टम द्वारा किए जाने वाले भेदभाव जैसी समस्याएं दिखने लगी हैं।

ग्राहक जैसे-जैसे एआई का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं, टाटा एआईजी अपनी मौजूदा पॉलिसियों में ही एआई से जुड़े जोखिमों के आकलन  को शामिल कर रही है। समय के साथ, इंश्योरेंस सेक्टर को उम्मीद है कि मार्केट में विशेष रूप से सिर्फ एआई के लिए समर्पित पॉलिसियां भी आ जाएंगी। इन पॉलिसियों में कानूनी लड़ाई का खर्च, थर्ड-पार्टी लायबिलिटी क्लेम्स, सरकारी जांच और एआई सिस्टम फेल होने के कारण ठप हुए कामकाज से होने वाले नुकसान के साथ-साथ अन्य जरूरी खर्चों को कवर किए जाने की संभावना है।

दूसरी ओर, नज्म बिलग्रामी के अनुसार, रेगुलेटरी एक्टिविज्म अब डीएंडओ क्लेम्स का एक मुख्य कारण बन गया है। टाटा एआईजी के डीएंडओ पोर्टफोलियो के तहत दर्ज होने वाले मामलों में से 30% से अधिक मामले अब सीधे रेगुलेटरी कार्रवाइयों से जुड़े हैं, जबकि पाँच से सात साल पहले यह आंकड़ा लगभग 13% था।

कंपनी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत में लायबिलिटी इंश्योरेंस का पूरा परिदृश्य बड़े बदलावों से गुजर रहा है। इसकी मुख्य वजहें लगातार बदलते रेगुलेटरी व कंप्लायंस नियम, कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट्स और कॉन्ट्रैक्ट लायबिलिटीज़ की बढ़ती जटिलता, ईएसजी खुलासों और ग्रीनवॉशिंग की कड़ी निगरानी, एआई अपनाने व गवर्नेंस से जुड़े नए जोखिम, लगातार बढ़ते साइबर खतरे व डेटा प्राइवेसी की चिंताएं, थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स व सप्लाई चेन पर बढ़ती निर्भरता, शेयरधारकों की बढ़ती सक्रियता व मैनेजमेंट की जवाबदेही, और क्रॉस-बॉर्डर मुकदमों व लायबिलिटी एक्सपोज़र की बढ़ती जटिलता हैं।