लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजाजीपुरम के गृह विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत “मानव स्वास्थ्य के लिए मिलेट्स” विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर शिवानी श्रीवास्तव के कुशल मार्गदर्शन एवं प्रोफेसर किरण सिंह के सफल संयोजन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में लगभग 70 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता पोषण वैज्ञानिक प्रोफेसर (डॉ.) रीता सिंह रघुवंशी (ICAR एमेरिटस वैज्ञानिक एवं गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर के कॉलेज ऑफ होम साइंस की पूर्व डीन) रहीं। उन्होंने पोषण एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव के आधार पर मिलेट्स के पोषणात्मक महत्व और दैनिक आहार में उनकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
व्याख्यान में डॉ. रघुवंशी ने मिलेट्स के पोषण मूल्य, स्वास्थ्य लाभ तथा विभिन्न आयु वर्गों के लिए उनकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मिलेट्स को “न्यूट्रि-सीरियल्स” बताते हुए दैनिक आहार में इनके समुचित समावेश की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मेजर मिलेट्स के अंतर्गत रागी, ज्वार और बाजरा तथा माइनर मिलेट्स के अंतर्गत कांगनी, कुटकी, कोदो, सांवा/झंगोरा, चीना एवं ब्राउनटॉप मिलेट के पोषण संबंधी महत्व की जानकारी दी।


मुख्य वक्ता ने विभिन्न आयु एवं जीवन-स्थितियों के अनुसार मिलेट्स की उपयोगिता समझाते हुए बताया कि बच्चों, किशोरियों, महिलाओं तथा वृद्धजनों के संतुलित पोषण में इनका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। उन्होंने रागी में कैल्शियम, बाजरा में प्रोटीन एवं आयरन तथा फॉक्सटेल मिलेट में लेसिथिन की उपलब्धता का उल्लेख करते हुए इनके पोषणात्मक महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने छोटे बच्चों के पूरक आहार में मिलेट्स को खिचड़ी आदि के रूप में शामिल करने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
महिलाओं के स्वास्थ्य के संदर्भ में उन्होंने प्रसवोत्तर पोषण तथा PCOS/PCOD जैसी जीवनशैली एवं हार्मोन से संबंधित समस्याओं में संतुलित आहार के महत्व को रेखांकित किया। वृद्धावस्था में संतुलित एवं पोषक आहार की भूमिका पर चर्चा करते हुए उन्होंने मिलेट्स को स्वस्थ जीवनशैली का उपयोगी हिस्सा बताया। साथ ही उन्होंने कुट्टू जैसे अन्य पोषक अनाजों के सेवन तथा HDL और रक्तचाप जैसे स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं से जुड़े आहार संबंधी महत्व पर भी जानकारी प्रदान की।
अपने व्याख्यान के समापन पर डॉ. रघुवंशी ने कहा कि मिलेट्स केवल अनाज नहीं, बल्कि पोषण से भरपूर “न्यूट्रि-सीरियल्स” हैं। उन्होंने कुपोषण, जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं तथा विभिन्न आयु वर्गों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित एवं विविधतापूर्ण आहार अपनाने पर जोर दिया।
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