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अस्पतालों की रसोई से मरीजों की थाली तक, खाद्य सुरक्षा विभाग की सघन जांच

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में जनस्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के क्रम में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने गांधी जयंती के अवसर पर राजकीय चिकित्सालयों एवं मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशव्यापी विशेष अभियान चलाया। महात्मा गांधी के स्वच्छता, सेवा और जनस्वास्थ्य के मूल्यों को व्यवहार में उतारते हुए विभागीय टीमों ने प्रदेश के सभी 75 जनपदों में राजकीय चिकित्सालयों एवं राजकीय मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध भोजनालयों और कैंटीनों का विशेष निरीक्षण किया।

अभियान के तहत करीब 42 राजकीय मेडिकल कॉलेजों तथा 150 जिला एवं अन्य राजकीय चिकित्सालयों से संबद्ध भोजनालयों-कैंटीनों की व्यवस्थाओं को परखा गया। इन स्थानों पर भर्ती मरीजों के साथ उनके तीमारदारों के लिए भी भोजन तैयार एवं उपलब्ध कराया जाता है। विभाग ने केवल भोजन की गुणवत्ता की जांच तक अभियान को सीमित न रखते हुए भोजन तैयार होने से लेकर उसके भंडारण, संरक्षण, परिवहन और मरीज तक पहुंचने की पूरी श्रृंखला को खाद्य सुरक्षा के मानकों पर परखा।

मरीजों के लिए सुरक्षित भोजन क्यों जरूरी

अस्पताल में भर्ती मरीज अपनी उपचार व्यवस्था के लिए अस्पताल प्रशासन पर निर्भर होता है। बीमारी की स्थिति में उसकी खाद्य संबंधी आवश्यकताएं भी सामान्य व्यक्ति से अलग हो सकती हैं। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षित रखरखाव सीधे मरीज के स्वास्थ्य और उपचार व्यवस्था से जुड़े विषय हैं।

इसीलिए अभियान का उद्देश्य केवल यह देखना नहीं था कि भोजन गुणवत्तापूर्ण है या नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी था कि भोजन जिस रसोई में तैयार हो रहा है, वहां स्वच्छता कैसी है, कच्चा माल सुरक्षित है या नहीं, भोजन किस प्रकार रखा जा रहा है और मरीज तक पहुंचने तक उसकी खाद्य सुरक्षा बनी हुई है या नहीं।

रसोई से मरीज की थाली तक, हर स्तर पर हुई जांच

निरीक्षण के दौरान भोजन निर्माण स्थल की स्वच्छता, खाद्य पदार्थों के भंडारण एवं संरक्षण, भोजन बनाने वाले कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, कच्चे माल की गुणवत्ता, पेस्ट कंट्रोल, तैयार भोजन के परिवहन एवं वितरण, पेयजल, बर्तनों एवं उपकरणों की साफ-सफाई, जल निकासी एवं अपशिष्ट निस्तारण तथा मरीजों की चिकित्सकीय आवश्यकताओं के अनुरूप भोजन की व्यवस्था की जांच की गई। कई भोजनालयों में व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं और आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध मिलीं। वहीं, कुछ स्थानों पर सुधारात्मक बिंदु भी सामने आए।

निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर किचन और खाद्य भंडारण क्षेत्रों में अस्वच्छकर परिस्थितियां पाई गईं। कहीं ड्रेनेज लीकेज तो कहीं आधारभूत ढांचे में कुछ समस्याएं नजर आईं। कुछ जगहों पर पेस्ट कंट्रोल की आवश्यकता महसूस की गई। इन कमियों को खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ रसोई के आधारभूत ढांचे के लिए भी सुधार योग्य माना गया।

14 दिन में सुधार, इसके बाद होगा फॉलो-अप निरीक्षण

विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभियान का उद्देश्य केवल कमियां दर्ज करना नहीं, बल्कि उनका समयबद्ध और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में संबंधित अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक या निदेशक को प्रमुख कमियों की जानकारी औपचारिक रूप से दी जा रही है। अस्पतालों को चिन्हित कमियों को दूर करने के लिए 14 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों द्वारा फॉलो-अप निरीक्षण किया जाएगा। 

यदि दोबारा निरीक्षण में अपेक्षित सुधार नहीं पाया जाता है, तो संबंधित खाद्य कारोबारकर्ता के लाइसेंस/पंजीकरण को निलंबित करने की कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी रसोई में आवश्यक मरम्मत या आधारभूत सुधार दो सप्ताह में पूरा करना संभव नहीं है, तो मरीजों को भोजन की आपूर्ति प्रभावित किए बिना वैकल्पिक व्यवस्था करना होगी। आवश्यकता पड़ने पर भोजन तैयार करने का काम किसी अन्य सुरक्षित, स्वच्छ और उपयुक्त परिसर में अस्थायी रूप से स्थानांतरित किया जा सकता है।