‘डांसर से अभिनेता बनने का सफर आसान नहीं था, खुद को साबित करने में लगा लंबा वक्त’: सुशांत पुजारी
फिल्म ‘थाप यू-ट्यूबर स्टार’ में मुख्य भूमिका में नजर आएंगे डांसर-अभिनेता सुशांत पुजारी
लखनऊ (शम्भू शरण वर्मा/टेलीस्कोप टुडे)। डांस की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले डांसर और अभिनेता सुशांत पुजारी अब फिल्म ‘थाप यू-ट्यूबर स्टार’ में मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म के मुहूर्त के अवसर पर टेलीस्कोप टुडे संवाददाता शम्भू शरण वर्मा से खास बातचीत में उन्होंने अपने डांसर से अभिनेता बनने के सफर, रेमो डिसूजा के साथ काम करने के अनुभव, फिटनेस, दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में काम करने और युवा कलाकारों के लिए अपने संदेश को साझा किया।
सुशांत पुजारी ने बताया कि उन्होंने करीब एक दशक से अधिक समय तक रेमो डिसूजा के साथ काम किया और इस दौरान डांस, कोरियोग्राफी से लेकर अभिनय तक बहुत कुछ सीखा। उन्होंने कहा कि बतौर अभिनेता शुरुआत करने को लेकर वह खुद भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे, लेकिन रेमो डिसूजा ने उनमें अभिनेता बनने की क्षमता देखी और उन्हें इसके लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, डांसर से अभिनेता बनने का यह सफर लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा।

उन्होंने कहा कि डांस के क्षेत्र में पहचान बनने के बाद लोगों के लिए उन्हें अभिनेता के रूप में स्वीकार करना आसान नहीं था। जब भी वह किसी नए प्रोजेक्ट के लिए जाते, लोगों की पहली पहचान उन्हें डांसर के रूप में होती थी। ऐसे में खुद को एक अभिनेता के तौर पर साबित करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती रही। उन्होंने बताया कि उनकी आने वाली फिल्मों में ‘वाइल्ड टाइगर सफारी’, जिसमें वह रेमो डिसूजा के साथ नजर आएंगे, और ‘पिपासु’, जिसमें उन्होंने पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई है, शामिल हैं। ‘थाप यू-ट्यूबर स्टार’ में मुख्य किरदार उनके अभिनय सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
डांस और अभिनय दोनों को साथ लेकर चलेंगे
सुशांत पुजारी ने कहा कि डांस उनके जीवन से कभी अलग नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आज देश में उन्हें जो पहचान मिली है, उसमें डांस की सबसे बड़ी भूमिका है। अभिनय को उन्होंने अपना दूसरा प्यार बताते हुए कहा कि कैमरे के सामने खड़े होकर अभिनय करना उन्हें बेहद पसंद है। उनका मानना है कि एक डांसर एक समय के बाद शारीरिक रूप से थक सकता है, लेकिन अभिनय में उम्र कभी बाधा नहीं बनती। इसलिए वह डांस और अभिनय दोनों को साथ लेकर चलना चाहते हैं।
सोशल मीडिया ने नए कलाकारों के लिए बढ़ाए अवसर
आज के दौर के डांसरों और अपने समय के कलाकारों के बीच अंतर बताते हुए उन्होंने कहा कि पहले कलाकारों को यह पता ही नहीं होता था कि ऑडिशन कहां होंगे और काम के अवसर कैसे मिलेंगे। आज सोशल मीडिया ने कलाकारों के लिए मंच आसान कर दिया है। इंस्टाग्राम और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए प्रतिभाओं को अपनी कला दिखाने का मौका मिल रहा है।
हालांकि उन्होंने नए कलाकारों को सलाह दी कि सोशल मीडिया की लोकप्रियता को ही सफलता का आधार न बनाएं। उन्होंने कहा कि कलाकारों को अपनी बुनियाद मजबूत करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर मिलने वाली लोकप्रियता कुछ समय के लिए हो सकती है, लेकिन यदि कला का आधार मजबूत नहीं है तो मुश्किल समय में कलाकार लड़खड़ा सकता है।
उन्होंने युवाओं से लगातार मेहनत करते रहने और कभी हार न मानने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सफलता आसानी से नहीं मिलती। फिल्म और मनोरंजन की दुनिया में संघर्ष कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता।
दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में काम करना रहा खास अनुभव
दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम करने के अनुभव को साझा करते हुए सुशांत पुजारी ने कहा कि वह मूल रूप से बेंगलुरु से हैं और दक्षिण भारत में काम करने के दौरान उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वह अपने घर लौट आए हों। दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में काम करने की उनकी लंबे समय से इच्छा थी।
उन्होंने वहां के वर्क एथिक्स और काम करने के तरीके की सराहना की और कहा कि दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में काम करके उन्हें काफी अच्छा अनुभव मिला।
फिटनेस को बताया सफलता का अहम हिस्सा
अपनी फिटनेस के बारे में सुशांत ने कहा कि उन्हें शुरुआती दौर में काम का अवसर भी फिटनेस की वजह से मिला था। इसलिए वह आज भी फिटनेस को लेकर बेहद गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि खान-पान पर नियंत्रण और नियमित व्यायाम उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि कलाकार के लिए फिट रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि आज का दौर फिटनेस का दौर है। उनका मानना है कि जब कोई व्यक्ति खुद फिट रहता है तो वह दूसरों को भी प्रेरित करता है।
परिवार से शुरुआत में नहीं मिला ज्यादा समर्थन
अपने शुरुआती सफर को याद करते हुए सुशांत पुजारी ने बताया कि परिवार से शुरुआत में उन्हें डांस को लेकर ज्यादा समर्थन नहीं मिला। वर्ष 1983 में जन्मे सुशांत के अनुसार, उस दौर में टेलीविजन और फिल्मों में डांस के जरिए करियर बनाने की संभावनाएं आज जैसी नहीं थीं। उनके पिता भी उनसे पूछते थे कि डांस में आखिर वह क्या करेंगे।

उन्होंने कहा कि उस समय उनके पास इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं था, लेकिन आज वह आत्मविश्वास से कह सकते हैं कि डांस के जरिए पहचान और करियर दोनों बनाया जा सकता है। समय के साथ जब परिवार को उनकी मेहनत और सफलता दिखाई देने लगी तो उन्हें परिवार का पूरा समर्थन मिलने लगा।
रेमो डिसूजा से जुड़ा मजेदार किस्सा भी साझा किया
रेमो डिसूजा के साथ शुरुआती दिनों की एक मजेदार याद साझा करते हुए सुशांत ने बताया कि उन्हें शुरुआत में माइक्रोफोन पर बोलने में झिझक होती थी। उन्हें लगता था कि माइक्रोफोन पर बोलते समय उनकी आवाज बहुत तेज हो जाती है। इसलिए वह माइक्रोफोन को पीछे रखकर बात किया करते थे।
विदेशी डांसर्स के साथ काम करते समय भाषा की समस्या के कारण वह कई बार हाथ के इशारों से अपनी बात समझाते थे। उन्होंने बताया कि एक बार रेमो सर ने उन्हें समझाया कि माइक्रोफोन से बात कैसे करनी है। इसके बाद उन्होंने कभी माइक्रोफोन से दूरी नहीं बनाई।
युवाओं से बोले—सपने देखने में कोई खर्च नहीं
आज के युवाओं के लिए संदेश देते हुए सुशांत पुजारी ने कहा कि उन्हें बड़े सपने देखने चाहिए। सपने देखने के लिए किसी तरह का खर्च नहीं होता। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी मंजिल और अपने उद्देश्य को पहचानकर लगातार मेहनत करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपनी पसंद और सपनों को लेकर पहले से अधिक स्पष्ट है। उनके अनुसार, उनकी पीढ़ी ने परिस्थितियों के साथ ज्यादा समझौते किए, जबकि आज के युवा अपने लक्ष्य को लेकर अधिक मुखर हैं।
फिल्म और समाज के रिश्ते को बताया अहम
फिल्मों और समाज के बीच संबंध पर उन्होंने कहा कि मीडिया और फिल्में समाज को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाज में जो घटता है, उसका प्रभाव फिल्मों में दिखाई देता है और फिल्मों में दिखाई जाने वाली चीजों का असर भी समाज पर पड़ता है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश में फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि फिल्म उद्योग और समाज के बीच बेहतर संबंध स्थापित होने से प्रदेश और फिल्म जगत दोनों को लाभ मिल सकता है। उन्होंने फिल्म निर्माण और शूटिंग के लिए प्रदेश में बन रहे सकारात्मक माहौल की भी सराहना की।
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