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Tag Archives: New ethos dissolving into the marital rite

वैवाहिक संस्कार में घुलते नए लोकाचार

डॉ. एस. के. गोपाल  भारतीय जीवन में विवाह केवल एक उत्सव नहीं बल्कि उस सांस्कृतिक श्रृंखला का केंद्रीय संस्कार है, जिसकी डोर पीढ़ियों से चली आ रही है। विवाह का अर्थ मात्र दो व्यक्तियों का साथ आना नहीं, बल्कि दो कुलों, दो परिवारों और दो आत्माओं का ऐसा मिलन है, …

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