Friday , February 6 2026

परंपरा बनाम पहचान : ‘शबद – रीत और रिवाज़’ का भावनात्मक सफर

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। ज़ी5 की ओरिजिनल सीरीज़, ‘शबद – रीत और रिवाज़’ छह एपिसोड की दिल को छू लेने वाली बेहद शानदार कहानी है, जिसमें बाप-बेटे के रिश्ते के पीछे छिपे जज्बातों, पुरानी और नई पीढ़ी के अरमानों और अपनी दिल की आवाज़ सुनने के लिए जरूरी हिम्मत को बड़ी संजीदगी से दिखाया गया है। अमित गुप्ता के डायरेक्शन में बनी इस सीरीज़ में मिहिर आहूजा और सुविंदर विक्की ने मुख्य किरदार निभाए हैं, जो अब हिंदी ज़ी5 पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है।

पंजाब के सतरंगी और सदियों पुराने परंपरा को संजोकर रखने वाले माहौल पर आधारित, शबद–  रीत और रिवाज़ की कहानी घुप्पी सिंह (मिहिर आहूजा) के इर्द-गिर्द घूमती है। जो घुप्पी साल का लड़का है, बचपन से ही हकलाकर बात करता है और जिसके ख्वाब उसके खानदानी रीति-रिवाजों और पुरानी परंपराओं को चुनौती देते हुए चुपचाप अपनी एक अलग राह बनाते हैं। उसके पिता, हरमिंदर सिंह (सुविंदर विक्की) एक जाने-माने रागी गायक हैं और कॉर्पोरेट दुनिया में काम करने के बावजूद, हरमिंदर की यही ख्वाहिश है कि उनका बेटा भक्ति संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाए। मगर घुप्पी के लिए खुद को ज़ाहिर करने और मन की खुशी पाने का असली जरिया भक्ति संगीत नहीं, बल्कि फुटबॉल का मैदान है, जहां उसे अपनी आजादी का एहसास होता है। 

शबद खानदानी परंपरा और अरमानों, तथा विरासत और खुद की अलग पहचान के बीच के टकराव को बड़ी बारीकी से दिखाता है। यह सीरीज़ एक ज़रूरी सवाल उठाती है – क्या विरासत ऐसी चीज़ है जो हमें अपनों से मिलती है, या ऐसी चीज़ है जिसे हम खुद अपने लिए चुनते हैं?

मिहिर आहूजा ने अपने किरदार के बारे में बात करते हुए कहा, “मैंने अब तक जितने किरदार निभाए हैं, उनमें घुप्पी का किरदार सबसे मासूम और सच्चा है। उसका हकलाना सिर्फ़ बोलने में परेशानी है, बल्कि यह उसके अंदर छिपे डर, उसके अरमानों, कामयाबी की भूख और खुद को साबित करने की कोशिशों का आईना है, जिसे वह खुलकर ज़ाहिर नहीं कर पाता। यह कहानी हर युवा की ज़िंदगी के उस अहम पड़ाव को बखूबी दिखाती है, जहाँ वह माता-पिता की हर बात मानने वाला अच्छा बच्चा बनने और अपने सपनों को जीने की कशमकश में उलझा होता है। मुझे यकीन है कि दर्शक घुप्पी के इस सफर में अपने खुद के संघर्षों की झलक देखेंगे और इस शो को ढेर सारा प्यार देंगे।”

सुविंदर विक्की ने कहा, “हरमिंदर धर्म और नियमों पर चलने वाला एक ऐसा पिता है, जिसे हमेशा अपनी विरासत के खोने का डर सताता रहता है। उसे सच में लगता है कि वह अपने बेटे की भलाई के लिए ही तो सब कर रहा है, चाहे उनका प्यार अनजाने में उस पर बोझ ही क्यों न बन जाए। शबद की यह बात मुझे सबसे अच्छी लगी कि इसमें माता-पिता को खलनायक की तरह नहीं दिखाया गया है, बल्कि इसमें यह दिखाया गया है कि कैसे अनकहे जज्बात और अधूरे सपने हमारे कामों पर असर डालते हैं। अपनी जड़ों से जुड़ी यह कहानी जज्बातों से भरी है, और ज्यादातर भारतीय घरों की सच्चाई को बखूबी बयां करती है।”

पंजाब के असली माहौल, सभी कलाकारों के जज्बातों से भरे शानदार अभिनय, और बड़ी ही मनमोहक कहानी के साथ, ‘शबद – रीत और रिवाज़’ को देखने का अनुभव वाकई बेमिसाल और दिल को छू लेने वाला है, जो हर उम्र के दर्शकों को पसंद आएगा।