नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समेत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों ने केंद्रीय बजट को ऐतिहासिक और समावेशी बताते हुए इसकी सराहना की है। वहीं विपक्ष के नेताओं ने इसे कॉर्पोरेट घरानों और आम आदमी की जरूरतों के बीच एक विफल प्रयास करार दिया है।संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह बजट आम आदमी के लिए ही है। विपक्ष के नेता अपने को आम आदमी नहीं समझते हैं, वो अपने को बहुत ही विशेष मानते हैं। उन्होंने कहा कि 11 सालों में जो संशोधन हुए हैं, वो तेज़ी से आगे बढ़ेंगे तो फायदा तो पक्ष-विपक्ष दोनों को ही होगा। मेरा सिर्फ विपक्ष के साथियों से इतना कहना है कि बजट अच्छा है उसका स्वागत कीजिए। राजनीति करके इसमें पानी फेरने का काम मत कीजिए। देश खुश है। आज भारत के बजट को दुनिया देख रही है।केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा कि यह बजट ‘सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक न्याय’ सुनिश्चित करता है। उन्होंने टेक्सटाइल श्रमिकों, दिव्यांगजनों और मध्यम वर्ग के लिए की गई घोषणाओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इसमें शहरों और गांवों की तरफ भी ध्यान दिया गया है और इस बजट से देश के हर वर्ग को न्याय मिलेगा।विपक्षी दल शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह बजट किसानों, मजदूरों, दलितों और महिलाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रगति की प्रशंसा की।भाजपा सांसद योगेन्द्र चांदोलिया ने कहा कि किसान, मज़दूर, गरीब, दलित, महिलाओं के लिए यह बजट बहुत अच्छा साबित होगा और प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के अंदर भारत आगे बढ़ता रहेगा। निर्मला सीतारमण को बहुत-बहुत बधाई, शुभकामनाएं!विपक्ष के नेताओं ने बजट के कार्यान्वयन और बुनियादी ढांचे पर गंभीर सवाल उठाए हैं।कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गिरते प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और रुपये के अवमूल्यन पर चिंता जताते हुए कहा कि नारियल जैसे क्षेत्रों के लिए हेडलाइंस तो दी गई हैं, लेकिन केरल जैसे उत्पादक राज्यों को वास्तविक लाभ मिलने के लिए बारीकियों को देखना होगा।समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बजट को आम आदमी की समझ से बाहर बताते हुए कहा कि यह बजट केवल ‘अदृश्य लोगों’ को लाभ पहुंचाने वाला है। किसानों की पैदावार की कीमत और मंडियों के बुनियादी ढांचे पर सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने तकनीकी दावों पर भी सवाल उठाया और कहा कि बिना बुनियादी ढांचे के नई तकनीक का कोई लाभ नहीं है।कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि इस साल के बजट में कुछ नहीं है। इसमें तो बड़े-बड़े घरानों के लिए बड़े-बड़े प्रोजेक्ट हैं। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा, रोजगार और किसानों की खुशहाली की बात आप करोगे नहीं, व्यापारी की तबाही हो रही हैं, तो देश का विकास कैसे होगा?तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस बजट को ‘फेसलेस’ ‘बेसलेस’ और ‘विजनलेस’ बताया। उन्होंने कहा कि इस बार के बजट में बंगाल का एक बार नाम तक नहीं लिया गया। इस बजट में युवा रोजगार की कोई चर्चा नहीं है और न ही रोजगार का सृजन कैसे होगा, यह भी नहीं बताया गया है।
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