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जेन जी और जेन अल्फा 2047 तक देश को बनाएंगे ‘विकसित भारत’ : अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली : केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जेन जी औऱ जेन अल्फा ही ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त कर 2047 तक देश को विश्व गुरु बनाएंगे। साथ ही युवा शक्ति की अथक मेहनत से भारत 2047 तक 25 ट्रिलियन आर्थिक शक्ति के रूप में उभरेगा। ये शताब्दी भारत की शताब्दी होने वाली है। शनिवार को केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव आकाशवाणी भवन के सभागार में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मशती और श्रीकांत जोशी की स्मृति में मदरलैंड इंटरनेशनल फाउंडेशन एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा आयोजित ”पंच परिवर्तन” संगोष्ठी में बोल रहे थे। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार, मदरलैंड इंटरनेशनल फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. एके अग्रवाल, सुरेश चौहान, शाहिद अख्तर, श्रीराम जोशी मौजूद रहे।सभा को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पंच परिवर्तन विचार ने पांच हजार साल पहले भारत विश्व गुरु रहा। दो हजार साल पहले भारत सभी क्षेत्रों में अग्रणी रहा है। भारत ने विश्व को गिनती सिखाई, दशमल्व दिया। सदियों से विश्व को दिशा देने वाला राष्ट्र भारत रहा। लेकिन बीच में कुछ दशकों तक अंग्रेजों ने गुलाम बनाए रखा, हमारे निर्माण क्षमता को बर्बाद कर दिया। लेकिन अब वो देश करवट ले रहा है। आज भारत विश्व में पांचवी आर्थिक ताक़त से चौथे स्थान पर आ गया है।उन्होंने कहा कि 11 साल देश में ९९ प्रतिशत मोबाइल फ़ोन देश के बाहर से आयात होते थे लेकिन आज परिस्थितियां बदली है। आज देश ९९ प्रतिशत फ़ोन भारत में बनते है और निर्यात होते हैं। दुनिया के कई देश आज वंदे भारत ट्रेन में दिलचस्प ले रहे हैं।वंदे भारत स्लीपर या रॉकेट हो या सेमी कंडक्टर चिप्स हो इन सब में देश के नागरिक की सोच छपी है। उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन में पर्यावरण अहम भाग रहा है। देश ने हमेशा पर्यावरण को सहेजा है। यह लोगों के घरों में तुलसी के पौधे के रूप देख सकते हैं।इस अवसर पर आरएसएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा कि पड़ोसी नहीं बदले जा सकते। लेकिन हम अपनी खोई हुई भूमि की तरफ़ तो जा सकते हैं। जो ख़त्म होना चाहता है उसका उत्तर खोज कर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन से समाज बदलेगा। किसी भी दूसरे देश में हिम्मत नहीं है जो ख़ुद को विश्व गुरु कहे। सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा, ऐसा दुनिया में कहीं और सुनाई नहीं देता है।पंच परिवर्तन के नियमों से हम विश्व गुरु बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्नता में एकता वाला देश है। यही इसकी सुंदरता है। इसलिए दुनिया की एकता का बेमिसाल उदाहरण है भारत। हम जीना जानते है और सबक सिखाना भी जानते हैं।इस अवसर पर मदरलैंडइंटरनेशनलफाउंडेशनकेअध्यक्षडॉ.एकेअग्रवाल ने पंच परिवर्तन संगोष्ठी की प्रस्तावना रखी और सभी से इसका स्मरण करने का आह्वान किया। इसके साथ सुरेश चौहान ने इस विषय पर अपने विचार रखे। मंच का संचालन श्रीराम जोशी ने किया।