लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। मातृभूमि की रक्षा के लिए हंसते-हंसते मर मिटने वाले वीर अमर सपूतों को नमन करते हुए, सूर्या थिएटर कल्चरल आर्ट्स सोसाइटी की ओर से नृत्य नाटिका, आज़ादी के रंग का मंचन किया गया। गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी के प्रेक्षागृह में मंचित इस नाटक में गुलाम भारत को आजादी दिलाने में अहम किरदार निभाने वाले वीर सपूतों के योगदान को जीवंत किया गया।


स्वाधीनता की जो चिंगारी मेरठ से भड़की, वह लखनऊ, कानपुर, झाँसी से भड़कती हुई पूरे देश में फैल गई। मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहब, बेगम हज़रत महल के शौर्य ने भारत में आज़ादी की लौ जला दी। जिसके बाद महात्मा गांधी, चंद्र शेखर आज़ाद, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक उल्ला ने भारत की आज़ादी के लिये महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आज़ादी के रंग नृत्य नाटिका सपना सिंह, निखिलेश, देवी लामा, प्रीती, मनीषा, राकेश, केसर, पीहू, हर्ष और प्रियांशु द्वारा प्रस्तुत किया गया।
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