लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तर प्रदेश ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उक्त बातें उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को आयोजित ‘उत्तर प्रदेश ऊर्जा संगम-2026’ को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम का आयोजन एसोचैम-इंडिया ने यूपीनेडा और इन्वेस्ट यूपी के सहयोग से किया।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई पीएम-कुसुम योजना किसानों को सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा अपनाने और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने के अवसर प्रदान कर रही है। वहीं, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत लोग सब्सिडी का लाभ लेकर अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगवा रहे हैं। इससे ऊर्जा संरक्षण, बिजली खर्च में कमी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है।

सौर ऊर्जा से किसानों को बिजली बचत और अतिरिक्त आय का अवसर
श्री पाठक ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध करा रही है। किसान ट्यूबवेल, उनकी छतों और खाली पड़ी जमीन पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर अपनी बिजली की जरूरतें पूरी कर सकते हैं। इसके साथ ही, अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर आय का नया स्रोत भी विकसित कर सकते हैं। कार्यक्रम में एसोचैम उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय निदेशक राजीव दीक्षित, रेडिको खेतान लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अंशु श्रीवास्तव, सौरदीप गुहा सहित उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सौर ऊर्जा नीति से निवेश और हरित ऊर्जा को बढ़ावा
मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में सितंबर 2022 में प्रदेश की नई सौर ऊर्जा नीति लागू की गई। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का विस्तार करना और निवेश को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि सोलर पैनल स्थापना में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम और सौर ऊर्जा क्षमता में पांचवें स्थान पर है। प्रदेश में लगभग 45 से 50 कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्र भी संचालित हैं।

ऊर्जा संगम में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में इलेक्ट्रोलाइजर विनिर्माण, ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। दूसरे सत्र में सौर ऊर्जा विनिर्माण, फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं, परियोजना क्रियान्वयन तथा पीएम सूर्य घर और पीएम-कुसुम योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

सत्रों में विशेषज्ञों ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाने, कारोबार सुगमता बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को सरल एवं तेज करने के सुझाव साझा किए। स्वच्छ ऊर्जा में निवेश, आधुनिक बिजली अवसंरचना और किसानों की भागीदारी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास को गति दे रही है। हरित ऊर्जा का विस्तार रोजगार और निवेश के नए अवसर सृजित करने के साथ वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में प्रदेश के योगदान को मजबूत करेगा।
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