लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सायोनी में सानवी की सबसे बड़ी चाह कोई बड़ी कामयाबी नहीं, बल्कि मां का प्यार है। बचपन से इस रिश्ते की कमी महसूस करने वाली सानवी आज भी उम्मीद करती है कि उसे कहीं न कहीं वह अपनापन मिलेगा जिसकी उसे तलाश है। पहले एपिसोड की खूबी यह है कि उसकी मासूमियत को बेबसी की तरह नहीं दिखाया गया। वह लोगों से दिल खोलकर मिलती है और ठेस लगने के डर के बावजूद रिश्तों पर भरोसा रखती है।
जाह्नवी सोनी सानवी की इस उम्मीद को अपने अभिनय में अच्छी तरह उतारती हैं। उसकी मुस्कान के पीछे छिपी चाह भी महसूस होती है। ऐसे में जब आदित्य उसकी ज़िंदगी में आता है, तो उनकी मुलाकात सिर्फ एक प्रेम कहानी की शुरुआत नहीं लगती। आदित्य उसे समझने की कोशिश करता है, उसकी बात सुनता है और उसके साथ खड़ा रहता है। गौतम सिंह विग ने इस किरदार को सहज रखा है। दोनों की केमिस्ट्री इतनी प्यारी है कि आप उनकी अगली मुलाकात का इंतज़ार करने लगते हैं।
लेकिन सानवी को हर कोई आदित्य की तरह नहीं देखता। माया की नज़र उस पर पड़ते ही कहानी का दूसरा पहलू सामने आता है। सानवी के गलती से आदित्य पर गिरने को माया संयोग नहीं मानती। उसका “सक्सेस पाने का आसान तरीका” कहना सिर्फ एक तीखी टिप्पणी नहीं है; यह बताता है कि बिना किसी को जाने उसके इरादों पर सवाल उठाना कितना आसान है।
यहीं सानवी और माया का फर्क सबसे असरदार लगता है। एक लड़की दुनिया से प्यार की उम्मीद रखती है, दूसरी महिला अपने अनुभवों के कारण हर बात को शक से देखती है। माया गलत राय बनाती है, लेकिन राशमी देसाई उसे ऐसा किरदार बनाती हैं जिसके बारे में आप और जानना चाहते हैं। आठ साल बाद फिक्शन में उनकी वापसी दमदार है। पहले ही एपिसोड में उनके तेवर और स्क्रीन प्रेज़ेंस कहानी में नई हलचल ले आते हैं।
सरगुन मेहता और रवि दुबे के ड्रीमियाता ड्रामा की सायोनी प्रेम कहानी के साथ एक दिलचस्प सवाल भी छोड़ता है: क्या सानवी को वह अपनापन मिल पाएगा जिसकी उसे तलाश है, खासकर जब माया उसे समझने से पहले ही परखने लगी है? आदित्य और सानवी की खूबसूरत जोड़ी इस सफर से जोड़ती है, और माया इसे आगे देखने की वजह देती है।
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