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आधुनिक भारत के निर्माण में कुशल इंजीनियरों की बढ़ती मांग

  • मैन्युफैक्चरिंग से विकसित भारत @2047 का संकल्प: प्लास्टिक एवं पॉलिमर उद्योग से लेकर एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तक युवाओं के लिए अवसर

भारत वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य की ओर तेज़ी से अग्रसर है। इस लक्ष्य को साकार करने के लिए देश में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), चिकित्सकीय उपकरण, सेमीकंडक्टर, रेलवे, रक्षा उत्पादन (Defense Production) तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उद्योगों एवं आधुनिक विनिर्माण इकाइयों (Manufacturing Units) की स्थापना की जा रही है, जिससे औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिली है। इन सभी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में प्लास्टिक और उन्नत पॉलिमर सामग्रियों (Advanced Polymers) का उपयोग बेहद तेजी से बढ़ रहा है। हल्के वजन, उच्च मजबूती और टिकाऊपन के कारण आज ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और रेलवे में पारंपरिक धातुओं के स्थान पर ‘इंजीनियरिंग प्लास्टिक’ को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, रक्षा उत्पादन और चिकित्सकीय उपकरणों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी हाई-परफॉर्मेंस प्लास्टिक सुरक्षा और दक्षता को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।

जैसे-जैसे इन विनिर्माण उद्योगों में प्लास्टिक का यह अनुप्रयोग (Application) बढ़ रहा है, वैसे-वैसे डिजाइनिंग, प्रोसेसिंग और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3D प्रिंटिंग) जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए कुशल इंजीनियरों (Skilled Engineers) की मांग भी लगातार तेजी से बढ़ रही है। आज के बदलते औद्योगिक परिदृश्य में इन अत्याधुनिक तकनीकों से लैस प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स की आवश्यकता सबसे अधिक है, जो इस विकास को नई गति दे सकें।

आज प्लास्टिक केवल उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे घरों में और दैनिक जीवन की बुनियादी जरूरतों (Basic Needs) का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हमारे घरों में प्लास्टिक का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। रसोईघर (Kitchen) के सुरक्षित बर्तनों और कंटेनरों से लेकर बच्चों के रंग-बिरंगे और सुरक्षित खिलौनों (Toys) तक—हर जगह प्लास्टिक की मौजूदगी है। आधुनिक जीवन को आसान बनाने वाले मोबाइल फोन, कंप्यूटर, अस्पतालों के जीवनरक्षक चिकित्सा उपकरण, कृत्रिम अंग और दवाओं की सुरक्षित पैकेजिंग इसी पर निर्भर हैं। हमारे घरों तक पानी पहुँचाने वाली पेयजल पाइपलाइन, स्मार्ट सिटी, मेट्रो रेल, बुलेट ट्रेन, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर एवं पवन ऊर्जा प्रणालियाँ, ड्रोन, अंतरिक्ष एवं रक्षा उपकरण, कृषि सिंचाई प्रणाली और स्वच्छ एवं ताज़ा भोजन रखने वाली उन्नत खाद्य पैकेजिंग (Food Packaging)—यानी घर की रसोई से लेकर अंतरिक्ष तक, लगभग प्रत्येक क्षेत्र में उन्नत पॉलिमर एवं पेट्रोकेमिकल उत्पादों की भूमिका निरंतर बढ़ रही है।

बढ़ती औद्योगिक मांग और घरों में लगातार बढ़ती उपयोगिता की वजह से आज भारत में पेट्रोकेमिकल एवं प्लास्टिक उद्योग तीव्र गति से विस्तार कर रहा है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) और उद्योग विश्लेषकों के अनुसार, वर्तमान में लगभग $40 बिलियन मूल्य का यह भारतीय प्लास्टिक उद्योग आने वाले समय में $100 बिलियन के आंकड़े को पार करने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। इस अभूतपूर्व विकास के परिणामस्वरूप उत्पाद डिज़ाइन, पॉलिमर प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, टूल एवं मोल्ड निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, परीक्षण, अनुसंधान एवं विकास (R&D), पुनर्चक्रण (Recycling), बायोपॉलिमर, सस्टेनेबल मटेरियल तथा सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में रोजगार एवं उद्यमिता के व्यापक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

भारतीय पेट्रोकेमिकल्स रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में भारत की प्रति व्यक्ति प्लास्टिक खपत (Per Capita Consumption) वैश्विक औसत की तुलना में काफी कम (लगभग 15 किलोग्राम) है, लेकिन इसमें आने वाले समय में 3 गुना वृद्धि होने का अनुमान है। प्रति व्यक्ति खपत में होने वाली इस बढ़ोतरी और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी की वैश्विक मांग के कारण, आने वाले दशकों में इस क्षेत्र में प्रशिक्षित इंजीनियरों की मांग लगातार बढ़ रही है, जो कि वर्तमान स्तर से 4 से 5 गुना तक हो जाएगी। ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIPMA) के रोजगार आकलनों के अनुसार, विशेषकर रीसाइक्लिंग, वेस्ट मैनेजमेंट और ग्रीन-पॉलिमर इनोवेशन (Eco-friendly Polymers) में हर साल हजारों नए स्किल्ड प्रोफेशनल्स की आवश्यकता होगी।

भारत में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (Additive Manufacturing) या 3D प्रिंटिंग का बाजार वर्तमान में लगभग 20-22% की वार्षिक विकास दर (CAGR) से बढ़ रहा है और 2028 तक इसके $170-180 मिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। आज वैश्विक स्तर पर ऑटोमोटिव, एयरोस्पेस और मेडिकल जैसे क्षेत्रों में 3D प्रिंटिंग का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जहाँ यह पारंपरिक विनिर्माण (traditional manufacturing) की तुलना में उत्पादन के समय को 40% से 50% तक कम कर देता है। वैश्विक स्तर पर 3D प्रिंटिंग बाजार 2030 तक $100 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करने की दिशा में अग्रसर है।  आने वाले समय में प्लास्टिक, पॉलिमर प्रोसेसिंग और मेटल कंपोजिट्स के क्षेत्र में कुशल 3D मैन्युफैक्चरिंग प्रोफेशनल्स की मांग में 30% से अधिक की वृद्धि होने की पूरी संभावना है, जो देश के आत्मनिर्भर भारत अभियान को एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।

इसी वैश्विक और राष्ट्रीय प्रगति की कड़ियाँ जोड़ते हुए,, भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग के अधीन स्थापित सिपेट:  (आईपीटी), लखनऊ युवाओं को विश्वस्तरीय तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास तथा उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। आधुनिक प्रयोगशालाएँ, अत्याधुनिक मशीनरी, अनुभवी संकाय, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति संस्थान की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

सिपेट:  (आईपीटी), लखनऊ में शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष, नवाचारी एवं रोजगारोन्मुख इंजीनियर के रूप में तैयार करना है। संस्थान का उद्योग-अकादमिक सहयोग, नियमित औद्योगिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, व्यक्तित्व विकास तथा तकनीकी कौशल विकास कार्यक्रम विद्यार्थियों को देश की अग्रणी कंपनियों में उत्कृष्ट अवसर प्राप्त करने में सक्षम बनाते हैं।

संस्थान ने पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों से लगातार उल्लेखनीय प्लेसमेंट उपलब्धियां दर्ज की हैं। इस दौरान बी.टेक. और एम.टेक. के विद्यार्थियों को ₹5 लाख प्रति वर्ष का औसत वार्षिक वेतन पैकेज (Average Package) तथा ₹9.6 लाख प्रति वर्ष का अधिकतम वेतन पैकेज (Maximum Package) प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उद्योगोन्मुख प्रशिक्षण, अनुभवी संकाय तथा विद्यार्थियों की उत्कृष्ट तकनीकी दक्षता का प्रमाण है।

आज सिपेट:(आईपीटी), लखनऊ के विद्यार्थी ऑटोमोबाइल, पेट्रोकेमिकल, प्लास्टिक प्रोसेसिंग, मेडिकल डिवाइस, पैकेजिंग, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, टूल एवं मोल्ड निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा बहुराष्ट्रीय विनिर्माण कंपनियों में महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को साकार करने में ऐसे कुशल तकनीकी मानव संसाधन देश की औद्योगिक प्रगति और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

आज जब भारत वैश्विक विनिर्माण हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब पेट्रोकेमिकल एवं पॉलिमर उद्योग देश की आर्थिक प्रगति और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे समय में इस क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करना केवल एक डिग्री अर्जित करना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनना है।

यदि आपका लक्ष्य आधुनिक तकनीक, उत्कृष्ट रोजगार, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक अवसरों से जुड़ा सफल करियर बनाना है, तो सिपेट:  (आईपीटी), लखनऊ आपके सपनों को साकार करने का श्रेष्ठ मंच है।

रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम

स्नातक (UG)

  • बी.टेक. (प्लास्टिक्स इंजीनियरिंग)
  • बी.टेक. (मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग)

स्नातकोत्तर (PG)

  • एम.टेक. (प्लास्टिक्स इंजीनियरिंग)

क्यों है सिपेट:(आईपीटी), लखनऊ युवाओं की पहली पसंद?

  • भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थान।
  • एआईसीटीई अनुमोदित रोजगारोन्मुख तकनीकी कार्यक्रम।
  • अत्याधुनिक पॉलिमर प्रोसेसिंग, CAD/CAM, CNC, मोल्ड डिज़ाइन एवं परीक्षण प्रयोगशालाएँ।
  • उद्योगों में इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट एवं औद्योगिक प्रशिक्षण।
  • अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप एवं उद्यमिता को प्रोत्साहन।
  • राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों में उत्कृष्ट प्लेसमेंट के अवसर।
  • व्यक्तित्व विकास एवं उद्योगोन्मुख कौशल विकास पर विशेष ध्यान।

लेखक

डॉ. राजेश पंडा एवं डॉ. आदित्य प्रकाश यादव

सिपेट:  (आईपीटी), लखनऊ