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RLB : गंभीर बीमारी भी नहीं रोक सकी नीतीश और अवनी की उड़ान, रची सफलता की मिसाल

लखनऊ (शम्भू शरण वर्मा/टेलीस्कोप टुडे)। गंभीर बीमारी, लंबा इलाज, अस्पताल के चक्कर और पढ़ाई से लगातार दूरी… इन तमाम मुश्किलों के बावजूद रानी लक्ष्मी बाई मेमोरियल स्कूल (RLB) के दो मेधावियों ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे हालात भी हार मान लेते हैं। बुधवार को घोषित हुए CBSE 12वीं के परीक्षा परिणाम में विद्यालय के छात्रों नीतीश गौतम और अवनी शर्मा ने शानदार सफलता हासिल कर संघर्ष और मेहनत की नई मिसाल पेश की।

विद्यालय के संस्थापक जयपाल सिंह और डायरेक्टर निर्मल टंडन ने मेधावियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जीवन में कभी खुद को कमजोर नहीं समझना चाहिए। सकारात्मक सोच और निरंतर मेहनत से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।

RLB सर्वोदय नगर शाखा के छात्र नीतीश गौतम ने 94.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। नीतीश इंजीनियर बनकर देश की प्रगति में योगदान देना चाहते हैं। उनके पिता इलेक्ट्रिशियन हैं, जबकि मां अंजू गृहिणी हैं। परिजनों के अनुसार जून 2025 में नीतीश टाइफाइड और निमोनिया की चपेट में आ गए थे। फेफड़ों में पानी भर जाने के कारण उन्हें कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। करीब एक माह तक वह स्कूल नहीं जा सके और लगभग सात माह तक उनका इलाज चलता रहा।

नीतीश ने बताया कि बीमारी के दौरान कमजोरी और तेज बुखार के कारण वह लंबे समय तक बैठकर पढ़ाई नहीं कर पाते थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। 12वीं की पढ़ाई के साथ उन्होंने JEE Mains की तैयारी भी जारी रखी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने 94.6 प्रतिशत अंक हासिल किए और 98 परसेंटाइल के साथ JEE Mains भी क्वालीफाई किया।

इसी तरह RLB की सी ब्लॉक इंदिरा नगर शाखा की छात्रा अवनी शर्मा ने भी संघर्ष के बीच सफलता हासिल की। अवनी ने 83.3 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। वह बी-फार्मा कर फार्मासिस्ट बनना चाहती हैं। उनके पिता धीरेंद्र प्रताप शर्मा उत्तर रेलवे में कार्यरत हैं, जबकि मां साधना शर्मा गृहिणी हैं।

परिजनों के मुताबिक मई 2025 में अवनी गंभीर बीमारी की चपेट में आ गई थीं। MDR से पीड़ित अवनी की सितंबर 2025 में सर्जरी हुई और उन्हें करीब 15 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। इसके बाद चिकित्सकों की सलाह पर लगभग दो माह तक उन्हें बेड रेस्ट करना पड़ा, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हुई।

अवनी ने बताया कि इस कठिन समय में माता-पिता और शिक्षकों ने लगातार उनका मनोबल बढ़ाया। बीमारी और शारीरिक कमजोरी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और अच्छे अंकों के साथ सफलता प्राप्त की। परिजनों के अनुसार वर्तमान में भी उनका इलाज जारी है।