लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पौधा संस्थान में “समावेशी विकास के लिए जिम्मेदार नवाचार” विषय के तहत राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 मनाया। जिसमें रणनीतिक साझेदारी, युवा सहभागिता और महिलाओं के आजीविका सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली मिश्रण प्रदर्शित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी (निदेशक, सीएसआईआर-सीमैप) एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों एवं वैज्ञानिको द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। डॉ. संजय कुमार (वैज्ञानिक-जी) द्वारा संस्थान की प्रमुख तकनीकी पहलों एवं आउटरीच कार्यक्रमों की जानकारी प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर निदेशक द्वारा सीएसआईआर-सीमैप के स्मारक बैज का विमोचन भी किया गया, जो संस्थान की “भारत के नवाचार इंजन” की परिकल्पना को दर्शाता है।

कार्यक्रम के दौरान नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न समझौता ज्ञापनों (MoUs) एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। सीएसआईआर-सीमैप एवं एम/एस फ्रेज़ूल इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ के मध्य फ्लोमॉप, क्लीन जर्म, मोस्प्रे, मोसरेप एवं क्लेनज़ी सहित पाँच हर्बल उत्पादों के बाज़ार विस्तार हेतु एक वर्षीय समझौता किया गया।

इसके अतिरिक्त, कृषि पारितंत्रों में हर्बल जैव-एजेंट्स के स्थानीय उत्पादन हेतु आईसीएआर-केवीके, एर्नाकुलम, केरल के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौता संपन्न हुआ। लखनऊ विकास प्राधिकरण के साथ औषधीय पौधों आधारित लैंडस्केपिंग, अरोमा पार्क एवं थीमैटिक ग्रीन कॉरिडोर हेतु तीन वर्षीय साझेदारी भी स्थापित की गई। साथ ही साथ तंतिया विश्वविद्यालय, राजस्थान के साथ सीएसआईआर दिशा-निर्देशों के अनुरूप कल्याण एवं स्वच्छता उत्पादों हेतु टीबीआईसी सेवाओं के लिए सहयोग समझौता किया गया।

श्रम दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर डॉ. सुनीता सिंह धवन द्वारा पॉश अधिनियम, 2013 पर जागरूकता व्याख्यान दिया। इसके साथ ही निदेशक द्वारा संस्थान से जुड़े श्रमिकों को सम्मानित किया गया।
आउटरीच गतिविधियों के अंतर्गत सीएसआईआर-सीमैप द्वारा उत्तर प्रदेश के निकटवर्ती जनपदों की स्वयं सहायता समूह (SHG) महिलाओं के लिए व्यावहारिक कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में हर्बल अगरबत्ती निर्माण, सुगंधित मोमबत्ती और शंकु बनाना, गुलाब जल, पुष्प जल मिश्रण तैयार करना तथा सुगंध पौधों पर आधारित पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के मूल्य संवर्धन संबंधी तकनीकों की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए 300 से अधिक स्कूली विद्यार्थियों ने सीएसआईआर-सीमैप परिसर का भ्रमण कर वैज्ञानिक गतिविधियों एवं शोध कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने संस्थान को असीम संभावनाओं की ‘गोल्ड माइन’ बताते हुए कहा कि अभी तक इसकी वैज्ञानिक क्षमता का केवल एक छोटा भाग ही उपयोग में लाया गया है जबकि आगे अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। उन्होंने संस्थान की उन्नत वैज्ञानिक अवसंरचना, मजबूत आईटी क्षमताओं एवं आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का उल्लेख करते हुए वैज्ञानिकों, तकनीकी कर्मचारियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं विद्यार्थियों के योगदान की सराहना की।

उन्होंने कहा कि अरोमा मिशन जैसी पहलों ने भारत को लेमनग्रास एवं आवश्यक तेलों के प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देशों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने समावेशी विकास, टीम भावना एवं नवाचार आधारित अनुसंधान पर बल देते हुए वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों से सीएसआईआर एवं राष्ट्रहित में सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने महिला कर्मचारियों के सम्मान एवं सुरक्षित कार्य वातावरण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को संस्थान की “वास्तविक रीढ़” बताया।
कार्यक्रम का समापन डॉ. ऋषिकेश भिसे (वैज्ञानिक-डी) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय कुमार (वैज्ञानिक-जी), डॉ. रमेश श्रीवास्तव (वैज्ञानिक-एफ) एवं डॉ. सुम्या पाठक (वैज्ञानिक-डी) द्वारा किया गया।
Telescope Today | टेलीस्कोप टुडे Latest News & Information Portal