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मृगनयनी मध्य प्रदेश प्रदर्शनी-2026 : हस्तशिल्प के संग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। ‘मृगनयनी मध्य प्रदेश प्रदर्शनी-2026’ हस्तशिल्प एवं हथकरघा मेला इन दिनों निरालानगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के माधव सभागार में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मध्य प्रदेश की पारंपरिक कला और शिल्प के अनूठे संगम के साथ यहां प्रस्तुत हो रहीं सांस्कृतिक गतिविधियां दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं।

मेले में जहां एक ओर मध्य प्रदेश के बुनकरों और शिल्पकारों को अपनी हस्तनिर्मित कलाकृतियों को प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है, वहीं लखनऊ के स्थानीय कलाकार भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

शुक्रवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में नृत्य मंथन स्कूल ऑफ डांस की संस्थापिका अंकिता बाजपेई के निर्देशन में साक्षी, आराध्या और आस्था ने गणेश वंदना “देवा श्री गणेशा…” तथा कृष्ण भजन “श्याम की जोगन…” पर समूह नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया।

इसके अलावा साक्षी यादव ने “हंसता हुआ नूरानी चेहरा…”, आस्था और आराध्या ने “घूमर घूमर…” तथा आराध्या वर्मा ने “ताल से ताल मिला…” पर एकल नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

इसी क्रम में रेड रोज सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गोमतीनगर की डांस टीचर मधुलिका बोस ने “घर मोरे परदेशिया…” और “जहां श्रीराम रहते हैं…” पर आकर्षक प्रस्तुति दी, जबकि डांस टीचर रीता चंद्रा ने “जाने क्या रंग चढ़ा मेरे तन-मन में…” पर नृत्य कर समां बांध दिया।

कार्यक्रम में प्रयाग आरोग्यम केंद्र के योगाचार्य प्रशांत शुक्ल के निर्देशन में योग साधिका मोहिनी पांडेय, ललिता अधिकारी और श्वेता गुप्ता ने विभिन्न योगासन प्रस्तुत कर दर्शकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया। इस दौरान कार्यक्रम समन्वयक रिचा आर्या भी उपस्थित रहीं।

आयोजकों के अनुसार, यह प्रदर्शनी 3 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें लगभग 35 से 40 बुनकर और शिल्पी अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं बिक्री कर रहे हैं। प्रभारी अरविंद शर्मा ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य लखनऊवासियों को उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प उत्पाद उपलब्ध कराना और बुनकरों को व्यापार एवं रोजगार का मंच प्रदान करना है।

मेला संयोजक एमएल शर्मा ने जानकारी दी कि प्रदर्शनी में पंचधातु एवं बेल मेटल की मूर्तियां, शिफॉन, मलबरी, क्रेप और कोसा सिल्क की साड़ियां, इंडिगो प्रिंट, हथकरघा की चादरें, जरी-जरदोजी, लकड़ी के खिलौने तथा ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत चंदेरी वस्त्र विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।