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ZORR रिव्यू: हॉरर, हास्य और ऑटोपायलट ज़िंदगी की कीमत

पहली झलक में ZORR एक शोरगुल से भरी Zombie Horror Comedy लग सकती है, लेकिन फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, यह साफ़ हो जाता है कि इसके दांत सिर्फ ज़ॉम्बियों के लिए नहीं हैं। यह फिल्म आज के उस इंसान पर हमला करती है जो हर दिन अलार्म की आवाज़ पर उठता है, काम की दौड़ में भागता है और रात को थककर गिर जाता है बिना यह सोचे कि उसने सच में जिया भी या नहीं।Kan Singh Sodha के प्रोडक्शन में बनी और Gourab Dutta द्वारा निर्देशित ZORR डराने से ज़्यादा बेचैन करती है। यह बेचैनी जानबूझकर पैदा की गई है। फिल्म की गति तेज़ है, संवाद तीखे हैं और माहौल पूरी तरह अराजक। लेकिन इसी अराजकता में फिल्म की आत्मा छुपी है। ZORR यह दिखाती है कि कैसे लगातार प्रेशर, टाइमलाइन और सफलता की भूख इंसान को भीतर से सुन्न कर देती है।फिल्म के किरदार किसी सुपरहीरो की तरह पेश नहीं किए गए। वे आम लोग हैं कमज़ोर, उलझे हुए और थके हुए। Rishab Chadha और Akash Makhija अपने किरदारों में जान डालते हैं और कहानी को विश्वसनीय बनाते हैं। दोनों के बीच की केमिस्ट्री फिल्म को भावनात्मक आधार देती है। Sonam Arora की मौजूदगी कहानी में मानवीय स्पर्श जोड़ती है, वहीं Joy Sengupta अपने अनुभव से फिल्म को गंभीरता प्रदान करते हैं। Vijai Singh सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद प्रभाव छोड़ जाते हैं। यहां कोई भी किरदार शोर मचाने के लिए नहीं है हर किसी की भूमिका ज़रूरी है।ZORR का संगीत सिर्फ बैकग्राउंड में नहीं रहता, बल्कि कहानी का हिस्सा बन जाता है। “Zorr Ka Dhakka” फिल्म की विचारधारा को सबसे साफ़ तरीके से सामने लाता है। यह गाना उस समाज पर टिप्पणी करता है जहां इंसान काम का गुलाम बन चुका है। Raju Singh Panesar का कंपोज़ किया यह ट्रैक और Dr. (Hon) Anusha Srinivasan Iyer के लिखे बोल मिलकर एक ऐसा गीत रचते हैं जो सुनने के बाद दिमाग में अटक जाता है। कई आवाज़ों का इस्तेमाल इसे सामूहिक अनुभव बना देता है जैसे हर कोई अपनी थकान गा रहा हो।तकनीकी स्तर पर ZORR आश्चर्यचकित करती है। ज़ॉम्बी मेकअप, एक्शन सीक्वेंस, वीएफएक्स और बैकग्राउंड स्कोर का तालमेल फिल्म को विश्वसनीय बनाता है। ये सभी तत्व कहानी को सपोर्ट करते हैं, उस पर हावी नहीं होते। एडिटिंग चुस्त है और फिल्म अपनी रफ्तार कभी नहीं खोती।Kan Singh Sodha का रचनात्मक हस्तक्षेप फिल्म के कई स्तरों पर दिखता है चाहे वह एडिटिंग हो या प्रमोशनल मटीरियल की सोच। Creative Director Shaan Chakraborty फिल्म की टोन को एक दिशा में बनाए रखने में सफल रहते हैं, जिससे फिल्म बिखरती नहीं, बल्कि और प्रभावशाली बनती है।ZORR ज़ॉम्बी जॉनर को नए नियमों में नहीं बांधती। यह उसे भारतीय ज़मीन पर उतारती है जहां डर से ज़्यादा पहचान होती है, और खून से ज़्यादा थकान। यह फिल्म आपको डराकर नहीं, बल्कि खुद से सवाल पूछने पर मजबूर करके याद रहती है।ZORR सिर्फ एक एंटरटेनर नहीं है। यह एक अनुभव है अजीब, शोर भरा और हैरान करने वाला। हँसी के बीच यह आपको रोककर पूछती है:क्या आप ज़िंदा हैं, या बस चलते जा रहे हैं?रेटिंग: 5/5