लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। जब कैनवास पर रंग बोलने लगें और विचार आकृतियों का रूप ले लें, तो कला सिर्फ देखने की चीज़ नहीं रहती, वह संवाद बन जाती है। एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी ‘कला दर्पण 2026’ कुछ ऐसा ही अनुभव लेकर आई, जहाँ देशभर के कलाकारों ने समकालीन कला की विविध और सशक्त अभिव्यक्तियों को एक मंच पर प्रस्तुत किया।
एमिटी स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का यह सातवां संस्करण है। जिसमें नवाचार, प्रयोगशीलता और बहु-विषयक दृष्टिकोण साफ़ दिखाई दिया। ड्राइंग से लेकर पेंटिंग, फोटोग्राफी और डिजिटल आर्ट तक फैली कलाकृतियों ने न केवल आज की कला प्रवृत्तियों को दर्शाया, बल्कि युवा कलाकारों को भविष्य की दिशा भी दिखाई।
प्रदर्शनी का उद्घाटन एमिटी विश्वविद्यालय की आर्ट गैलरी में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के डीन डॉ. गरुण मिश्रा ने किया। इस अवसर पर एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) अनिल वशिष्ठ और एमिटी स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स एवं फैशन टेक्नोलॉजी की निदेशिका प्रो. (डॉ.) पूजा वर्मा की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
प्रो-वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) अनिल वशिष्ठ ने मुख्य अतिथि को प्रदर्शनी का अवलोकन कराया और सभी कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। मुख्य अतिथि डॉ. गरुण मिश्रा ने प्रदर्शनी में शामिल कलाकृतियों की खुले मन से सराहना करते हुए कहा कि कला दर्पण देशभर के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दर्शाने का एक समृद्ध मंच बन चुका है। उन्होंने प्रदर्शनी में शामिल कलाकारों को विभिन्न अवार्डाें और पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया।
इस वर्ष ‘कला दर्पण’ में देश के विभिन्न कोनों से आई कलाकृतियां देखने को मिली। प्रदर्शनी में दिल्ली, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, राजस्थान, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से 70 कलाकारों की 150 से अधिक कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गईं हैं।

प्रदर्शनी में गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स, कोलकाता, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, बिट्स पिलानी, डॉ. शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ, तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद और बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, लखनऊ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ-साथ शौकिया, फ्रीलांस और स्व-प्रशिक्षित कलाकारों की भागीदारी ने प्रदर्शनी को और भी जीवंत बना दिया।
प्रदर्शनी में आईं कलाकृतियों में डिजिटल आर्ट श्रेणी में सुलेखा पांडेय, सुमन तिवारी और सतीश कुमार ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया, जबकि प्रेम कुमार को सांत्वना पुरस्कार मिला। पेंटिंग श्रेणी में समीक्षा अवस्थी शीर्ष पर रहीं, उनके बाद पायल वर्मा और पायल त्रिपाठी रहीं, वहीं रचना सिंह को सांत्वना पुरस्कार से नवाज़ा गया। फोटोग्राफी वर्ग में जितेंद्र सिंह, अमित कुमार और धर्मेंद्र ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जबकि मोसद्दिक रज़ा को सांत्वना पुरस्कार मिला।
प्रदर्शनी का संयोजन डॉ. अंगद वर्मा (सहायक प्राध्यापक, एमिटी स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स) द्वारा किया गया। ‘कला दर्पण 2026’ न केवल एक प्रदर्शनी रहा, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी बना कि भारतीय समकालीन कला निरंतर नए विचारों, नए माध्यमों और नई संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रही है। यह प्रदर्शनी 3 फरवरी 2026 तक कला प्रेमियों के लिए खुली रहेगी।
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