शाहजहांपुर (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। भले ही सिक्स पैक एब्स न हों, लेकिन पेट बाहर न निकला हो, वजन भी कंट्रोल में रहता हो और कोई गंभीर बीमारी नजर न आती हो, इन सब संकेतों को देखकर हम अक्सर खुद को फिट मान लेते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि केवल बाहर से फिट दिखना सेहत की गारंटी नहीं है। खासकर दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले में यह सोच खतरनाक साबित हो सकती है, क्योंकि लगभग 50% मामलों में शुरुआती लक्षण दिखाई ही नहीं देते।
इसी को लेकर शुक्रवार को मेदांता हॉस्पिटल की ओर से शाहजहांपुर में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें दिल, दिमाग और रेडियोलॉजी से जुड़ी अहम जानकारियां आम लोगों के साथ साझा की गईं। कार्यक्रम में डॉ. राम कीर्ति सरन (डायरेक्टर क्लिनिकल एंड प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी), डॉ. कमलेश सिंह भैसोरा (डायरेक्टर न्यूरोसर्जरी) और डॉ. रोहित अग्रवाल (डायरेक्टर, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी) शामिल रहे।
डॉ. राम कीर्ति सरन ने कहा, “आज भी बड़ी संख्या में लोग यह मानते हैं कि अगर वे ओवरवेट नहीं हैं तो उन्हें दिल से जुड़ी बीमारियां नहीं हो सकतीं, जबकि यह धारणा पूरी तरह गलत है। उन्होंने बताया कि हार्ट डिजीज से जुड़े करीब 50 प्रतिशत मामलों में शुरुआती संकेत नहीं मिलते। तीनों कोरोनरी आर्टरीज में से किसी एक आर्टरी में अगर 60 प्रतिशत तक ब्लॉकेज हो, तब भी कई बार कोई लक्षण नहीं दिखता। यही कारण है कि सामान्य जांच में 30 से 50 प्रतिशत तक ब्लॉकेज पकड़ में नहीं आ पाते।”
उन्होंने बताया कि सीने में दर्द या जलन को लोग अक्सर गैस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और डायजीन जैसी दवाइयों का इस्तेमाल करने लगते हैं, जो खतरनाक हो सकता है। ऐसी स्थिति में सीटी एंजियोग्राफी और कोरोनरी कैल्शियम स्कोर जैसे टेस्ट मददगार होते हैं। जिनसे 20 प्रतिशत ब्लॉकेज तक का भी पता लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि दिल की बीमारी के संभावित खतरे को पहचानने के लिए पेट की मोटाई यानी एबडॉमिनल ओबेसिटी पर ध्यान देना जरूरी है। अगर पेट की परिधि 90 सेंटीमीटर से ज्यादा है तो सतर्क हो जाना चाहिए। इसके साथ ही बीपी, कोलेस्ट्रॉल और शुगर को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है। तंबाकू सेवन से दूरी और शराब का सीमित या शून्य सेवन दिल की सेहत के लिए फायदेमंद है। नियमित फिजिकल एक्टिविटी और रोजाना वॉक को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की सलाह भी उन्होंने दी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छाती में होने वाला हर दर्द हार्ट अटैक नहीं होता, क्योंकि अस्पताल में आने वाले करीब 75 प्रतिशत मामलों में दर्द गैस, मांसपेशियों के दर्द या एंग्जायटी से जुड़ा होता है।
डॉ. कमलेश सिंह भैसोरा ने बताया, “दिमाग से जुड़ी कई गंभीर बीमारियां भी शुरुआत में बिना किसी साफ लक्षण के आगे बढ़ती रहती हैं। अचानक सिरदर्द, हाथ-पैर में कमजोरी, बोलने में दिक्कत या चक्कर आना जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से ब्रेन से जुड़ी कई जटिल स्थितियों में जान बचाई जा सकती है।”
डॉ. रोहित अग्रवाल ने कहा, “आज के समय में रेडियोलॉजी और इमेजिंग जांच बीमारियों की शुरुआती पहचान में बेहद अहम भूमिका निभा रही हैं। आधुनिक इमेजिंग तकनीकों की मदद से बीमारी को शुरुआती स्टेज में ही पकड़कर इलाज आसान और ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है। सही समय पर कराई गई जांच कई बार बड़ी सर्जरी या जटिल इलाज से भी बचा सकती है।”
कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों ने लोगों से अपील की कि वे केवल लक्षणों के भरोसे न रहें, बल्कि नियमित हेल्थ चेक-अप को अपनी आदत बनाएं, ताकि गंभीर बीमारियों को समय रहते रोका जा सके।
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