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एक परिवार को आत्मनिर्भर बनाना महाकुंभ से भी बड़ा पुण्य : राज्यपाल

  • क्राफ्टरूट्स हस्तशिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ, 22 राज्यों के 90 से अधिक शिल्पकारों की कलाकृतियां बनीं आकर्षण का केंद्र

कानपुर (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि पारंपरिक हस्तशिल्प और कारीगरों का हुनर आत्मनिर्भर भारत की बड़ी ताकत है। किसी एक परिवार को स्वावलंबी बनाना, उसे रोजगार उपलब्ध कराना और उसकी आय बढ़ाने में सहयोग देना महाकुंभ से भी बड़ा पुण्य का कार्य है। हस्तनिर्मित प्रत्येक उत्पाद के पीछे कारीगर का वर्षों का अनुभव, परिश्रम और पीढ़ियों से अर्जित कौशल होता है। ऐसे में कारीगरों को उचित बाजार, उनके श्रम का सही मूल्य, प्रशिक्षण और सम्मान उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

राज्यपाल शुक्रवार को कानपुर के चुन्नीगंज स्थित कन्वेंशन सेंटर में ग्रामश्री एवं क्राफ्टरूट्स की ओर से आयोजित पांच दिवसीय 93वीं क्राफ्टरूट्स हस्तशिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ करने के बाद संबोधित कर रही थीं। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों के स्टालों का अवलोकन कर उनसे संवाद किया। प्रदर्शनी में 22 राज्यों के 90 से अधिक शिल्पकार अपनी कलाकृतियों और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि कारीगर की आमदनी बढ़ने से पूरे परिवार का जीवन स्तर सुधरता है। बच्चों को बेहतर शिक्षा, पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं। इसलिए हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देना केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि क्राफ्टरूट्स की प्रदर्शनी देश की विविधता में एकता का सजीव उदाहरण है। इसमें फिरोजाबाद की कांच कला, छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क, मध्य प्रदेश का बाग प्रिंट और पश्चिम बंगाल की पट्टचित्र कला सहित अनेक पारंपरिक कलाओं की झलक दिखाई दे रही है।

कारीगरों की सूची बनाकर योजनाओं से जोड़ें अधिकारी

राज्यपाल ने जिलाधिकारी और जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि कानपुर के पारंपरिक कलाकारों एवं शिल्पकारों की सूची तैयार कराई जाए। उनकी जरूरतों के अनुसार पात्रता के आधार पर केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, प्रशिक्षण सुविधाओं तथा ऋण सहायता से उन्हें जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय कलाकारों को प्रदर्शनी लगाने के लिए उपयुक्त स्थान और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उनके उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सके।

उन्होंने उद्योगपतियों, अधिकारियों, विश्वविद्यालयों और आम नागरिकों से स्थानीय हस्तनिर्मित उत्पाद खरीदने की अपील की। उपहार देने के लिए शॉल, वस्त्र, सजावटी सामान और अन्य हस्तशिल्प उत्पादों को प्राथमिकता देने से कारीगरों की आय बढ़ सकती है। राज्यपाल ने कहा कि उत्पादों का मूल्य तय करते समय कच्चे माल के साथ उसे बनाने में लगे समय, श्रम, अनुभव और कौशल का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

विश्वविद्यालयों में हुनरमंद कारीगरों को मिले स्थान

राज्यपाल ने पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय अनुभवी शिल्पकारों को ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में जोड़ें। विद्यार्थियों को कार्यशालाओं और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से पारंपरिक हुनर की बारीकियां सिखाई जाएं, ताकि वे कौशल के आधार पर स्वरोजगार शुरू करने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कलाओं में आधुनिक डिजाइन और उपयोगी उत्पादों को शामिल करना जरूरी है, लेकिन उनकी मौलिकता भी बनी रहनी चाहिए। उचित बाजार और सम्मान मिलने से विलुप्त होती कलाओं को बचाया जा सकता है और नई पीढ़ी को उनसे जोड़ा जा सकता है।

कारीगरों के पुनर्वास में ग्रामश्री की भूमिका सराही

आनंदीबेन पटेल ने गुजरात में आए भूकंप के बाद कारीगरों की सहायता और पुनर्वास के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ग्रामश्री एवं क्राफ्टरूट्स की संस्थापिका अनारबेन पटेल ने प्रभावित क्षेत्रों में कारीगरों को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए प्रोत्साहित किया। राज्यपाल ने संस्था की सामाजिक गतिविधियों, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार सृजन के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से अपने गोद लिए गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए आवश्यक सामग्री स्थानीय कारीगरों से खरीदने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा, जिससे बाल कल्याण के साथ स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिल सके।

ग्रामश्री एवं क्राफ्टरूट्स की संस्थापिका अनारबेन पटेल ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य पारंपरिक हस्तकलाओं को प्रोत्साहित करने के साथ शिल्पकारों, विशेषकर महिला कारीगरों, को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। संस्था से जुड़ी लीना रावल के अनुसार, यह पहल देशभर के 35 हजार से अधिक कारीगरों से जुड़ी है। 

कार्यक्रम में टाइम्स ऑफ इंडिया के रीजनल हेड मोहित माथुर, रिमझिम इस्पात के सीएमडी योगेश अग्रवाल, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रशासनिक अधिकारी, उद्यमी और बड़ी संख्या में कला प्रेमी मौजूद रहे। प्रदर्शनी में 50 रुपये से शुरू होने वाले उत्पादों की खरीद के साथ पारंपरिक हस्तकलाओं के सजीव प्रदर्शन का अवसर भी उपलब्ध है।