- महर्षि यूनिवर्सिटी के सातवें दीक्षांत समारोह में 2279 विद्यार्थियों को मिलीं डिग्री और डिप्लोमा
- राज्यपाल ने मिनी एक्सपो में देखे विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट
लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखना चाहिए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अत्यधिक निर्भर होने के बजाय अपनी बुद्धिमत्ता, विवेक और रचनात्मकता का उपयोग करना चाहिए। उक्त बातें महर्षि यूनिवर्सिटी के सातवें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहीं। उन्होंने विद्यार्थियों से यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग किसी को भ्रमित करने के लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के हित में करेंगे। सकारात्मक सोच के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए कार्य करना ही सच्ची शिक्षा का उद्देश्य है।

महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, लखनऊ के सातवें दीक्षांत समारोह में गुरुवार को 2279 विद्यार्थियों को डिग्री और डिप्लोमा प्रदान किए गए। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शिक्षा के साथ रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अब पृथ्वी से आगे बढ़कर अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी काम करने की जरूरत है। उन्हें उम्मीद है कि विश्वविद्यालय रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने का काम करेगा।
विद्यार्थियों के इनोवेटिव प्रोजेक्ट देखकर की सराहना
दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों की ओर से तैयार किए गए इनोवेटिव प्रोजेक्ट का मिनी एक्सपो भी लगाया गया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट देखे। एक्सपो में सामाजिक समस्याओं के समाधान से जुड़े प्रोजेक्ट, तकनीकी मॉडल, वैदिक विज्ञान पर आधारित प्रस्तुतियां और शोध कार्य प्रदर्शित किए गए।

प्रदर्शनी में सॉकर रोबो बोट जैसे तकनीकी प्रोजेक्ट के साथ महर्षि महेश योगी के जीवन, विचारों और योगदान से जुड़े शोध भी प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा लाइव योग डेमो क्लास और एनीमेशन के विद्यार्थियों की ओर से तैयार ‘एनिम वर्स’ भी आकर्षण का हिस्सा रहे। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी तकनीकी समझ, रचनात्मकता और नए विचारों को सामने रखा।
‘शिक्षा देना ही सबसे बड़ी समाजसेवा’
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने महर्षि संस्थान के विभिन्न विश्वविद्यालयों की ओर से किए जा रहे समाजसेवा के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रदान करना अपने आप में सबसे बड़ी सेवा है, लेकिन इसके साथ संस्थान लगातार समाजसेवा के अन्य कार्य भी कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर देगा। राज्यपाल के इस संदेश में उच्च शिक्षा को केवल डिग्री और रोजगार तक सीमित न रखते हुए समाज की जरूरतों से जोड़ने पर जोर रहा। विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट और शोध कार्यों की प्रदर्शनी भी इसी दिशा में उनकी प्रतिभा और व्यावहारिक सोच को सामने लाने का अवसर बनी।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से उनकी परियोजनाओं के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और व्यावहारिक उपयोगिता के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा उनके विकास, सुधार और भविष्य में उपयोग की संभावनाओं को लेकर आवश्यक सुझाव एवं मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने नवाचारों को समाजोपयोगी बनाने तथा शोध एवं उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न शैक्षणिक, रचनात्मक एवं नवाचार संबंधी गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए शोध कार्यों को और अधिक बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहकर शोध, नवाचार और व्यावहारिक प्रयोगों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। विश्वविद्यालय में विद्यार्थी विभिन्न विषयों पर जो शोध कर रहे हैं, उनका लाभ समाज और देश को मिलना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग जनहित में करते हुए ऐसे शोध करने के लिए प्रेरित किया, जो देश की आवश्यकताओं के अनुरूप हों तथा विकास की नई संभावनाएँ उत्पन्न करें।

राज्यपाल ने कहा कि सरकार शोध के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। विद्यार्थियों को इन शोध कार्यों का सही उपयोग करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिजली गिरने से होने वाली मौतों को रोकने, सुनामी एवं भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं तथा अंतरिक्ष के क्षेत्र में शोध कार्य किए जा रहे हैं। आने वाला समय अंतरिक्ष का है और सभी देश अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी जगह बनाने के लिए प्रयासरत हैं।

‘भारत में सदियों से रही है शिक्षा की समृद्ध परंपरा’
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य ऐसा होना चाहिए कि व्यक्ति मानवता की सेवा कर सके। उन्होंने भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि जब दुनिया के कई हिस्सों में शिक्षा की व्यवस्थित व्यवस्था नहीं थी, तब भारत में गुरुकुल हुआ करते थे। नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय भी भारत की समृद्ध शैक्षणिक परंपरा के उदाहरण हैं। उनके संदेश का मुख्य जोर शिक्षा के माध्यम से ऐसे व्यक्तित्व तैयार करने पर रहा, जो अपने ज्ञान का उपयोग समाज और मानवता के हित में कर सकें।

जनभवन के 400 बच्चों के लिए टी-शर्ट भेंट
समारोह के दौरान समाजसेवा से जुड़ी एक पहल भी सामने आई। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने आदर्श माध्यमिक विद्यालय, जनभवन, उत्तर प्रदेश के 400 बच्चों के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को टी-शर्ट भेंट की। यह पहल समारोह में शिक्षा के साथ बच्चों और समाज से जुड़े कार्यों के महत्व को भी सामने लाती है।
20 शोधार्थियों को पीएचडी, 1612 विद्यार्थियों को स्नातक की डिग्री
दीक्षांत समारोह में कुल 2279 विद्यार्थियों को डिग्री और डिप्लोमा प्रदान किए गए। इनमें 20 शोधार्थियों को पीएचडी, 324 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर और 1612 विद्यार्थियों को स्नातक की डिग्री दी गई। इसके अलावा 323 विद्यार्थियों को डिप्लोमा प्रदान किए गए।

डिग्री के साथ नए विचारों और शोध को बढ़ावा
दीक्षांत समारोह में डिग्री वितरण के साथ विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट और शोध कार्यों को मिली जगह ने उच्च शिक्षा में व्यावहारिक ज्ञान की अहमियत को भी सामने रखा। राज्यपाल और उच्च शिक्षा मंत्री के संबोधन में शिक्षा, समाजसेवा, रिसर्च और इनोवेशन को लेकर दिए गए संदेश ने विद्यार्थियों को नए क्षेत्रों में काम करने और अपने ज्ञान का उपयोग समाज के हित में करने की दिशा दिखाई।
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव, महर्षि संस्थान के उपाध्यक्ष राहुल भारद्वाज, कुलपति प्रो. भानु प्रताप सिंह, मुख्य वित्त अधिकारी वरुण श्रीवास्तव और कुलसचिव डॉ. गिरीश छिमवाल मंच पर मौजूद रहे।
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