तिरुपति (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। मोहन बाबू यूनिवर्सिटी (एमबीयू) ने भारतीय एडटेक प्लेटफॉर्म, फिज़िक्सवाला (पीडब्ल्यू स्किल्स) के साथ साझेदारी की है। यह प्लेटफॉर्म, अपने करियर-कौशल मंच के ज़रिए छात्रों को आसानी से उपलब्ध और व्यापक शैक्षणिक अनुभव प्रदान करता है। इसका उद्देश्य है, छात्रों को कक्षा की पढ़ाई के साथ-साथ कार्यस्थल की ज़रूरतों के अनुरूप तैयार करना। इस गठजोड़ के तहत, एमबीयू के छात्र उद्योग का अनुभव हासिल कर सकेंगे, साथ ही इसमें व्यावहारिक शिक्षा और करियर की व्यवस्थित तैयारी भी शामिल होगी। इससे छात्रों को प्रौद्योगिकी के लिहाज़ से क्षमता निर्माण के साथ-साथ बदलते रोज़गार के माहौल में आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी व्यापक कौशल विकसित करने के अवसर मिलेंगे।
यह साझेदारी ऐसे दौर में हुई है जब शिक्षा और रोज़गार के बीच का अंतर राष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ है। ‘विकसित भारत के मानव पूंजी’ रिपोर्ट के अनुसार 2025 में युवाओं की रोज़गार पाने की क्षमता 54.8% थी और भारतीय कंपनियों, खास तौर पर आईटी, इंजीनियरिंग सेवाओं तथा बिक्री के क्षेत्रों में प्रतिभा (कर्मचारियों) की कमी का स्तर 63% था। साथ ही, विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) की ‘रोज़गार का भविष्य रिपोर्ट 2025’ में अनुमान जताया गया है कि 2030 तक कर्मचारियों के मौजूदा कौशल में से 39% के बदलने या अप्रासंगिक हो जाने की संभावना है।
नियोक्ता विश्लेष्णात्मक सोच (एनालिटिकल थिंकिंग), अनुकूलन क्षमता, प्रौद्योगिकी साक्षरता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा जैसे कौशल को प्राथमिकता देते रहेंगे। इन रुझानों से स्पष्ट है कि एमबीयू जैसे विश्वविद्यालयों को उच्च शिक्षा में उद्योग के अनुभव, व्यावहारिक शिक्षा और करियर की तैयारी को और बेहतर ढंग से शामिल करने की ज़रूरत हो सकती है।
इस साझेदारी के तहत, एमबीयू के छात्रों को पीडब्ल्यू स्किल्स के साथ उद्योग की ज़रूरतों के अनुरूप पढ़ाई का अनुभव मिलेगा। इसमें व्यावहारिक प्रशिक्षण, परियोजनाएं, मौजूदा टूल और टेक्नोलॉजी का अनुभव और उद्योग के विशेषज्ञों के सत्र शामिल होंगे। छात्रों को करियर की तैयारी पर केंद्रित सहायता भी मिलेगी, जिसमें सॉफ्ट स्किल, एप्टीट्यूड की तैयारी, विशिष्ट क्षेत्र की तैयारी, भूमिका विशेष की तैयारी और साक्षात्कार की तैयारी शामिल है।
यह कार्यक्रम दो-शिक्षक वाले मेंटरशिप मॉडल पर आधारित होगा, जिसमें उद्योग के विशेषज्ञ छात्रों को वास्तविक टूल और उद्योग के माहौल से रू-ब-रू कराएंगे, जबकि एमबीयू के शिक्षक विश्वविद्यालय परिसर में पढ़ाई में मदद करेंगे। सीखने का यह सफर तीन सेमेस्टर में पूरा होगा और इसे छात्रों की शैक्षणिक ज्ञान के साथ कौशल विकास को जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है। एमबीयू के छात्रों को उद्योग से जुड़े कई लर्निंग पाथवे मिलेंगे, जिनमें डेटा एनालिटिक्स और डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग, फुल स्टैक डेवलपमेंट और डिजिटल मार्केटिंग शामिल हैं।

मोहन बाबू यूनिवर्सिटी के उप कुलाधिपति (प्रो-चांसलर), विष्णु मांचू ने कहा, “हमारे छात्र ऐसी दुनिया में कदम रख रहे हैं जहां बदलाव की रफ्तार बड़ी चुनौती भी है और अवसर भी। एमबीयू में, हम चाहते हैं कि वे इस बदलाव को अपने लाभ के तौर पर देखें। मज़बूत बुनियादी जानकारी, उद्योग की ज़रूरतों के अनुरूप अनुभव और भरोसेमंद मार्गदर्शन से ही महत्वाकांक्षा करियर में बदलती है। पीडब्ल्यू स्किल्स के साथ यह गठजोड़ हमारे छात्रों को एआई, डेटा और डिजिटल जैसे क्षेत्रों में वह मिश्रण प्रदान कर रहा है, जहां रोज़गार का भविष्य तय हो रहा है। किसी विश्वविद्यालय का काम उन अवसरों तक पहुंचने की राह तैयार करना, और हमें फिज़िक्सवाला के साथ मिलकर ऐसा करने पर गर्व है।”
मोहन बाबू यूनिवर्सिटी के कार्यकारी निदेशक, विनय माहेश्वरी ने कहा, “नौकरी पाने की काबिलियत आखिरी सेमेस्टर में नहीं बनती। यह धीरे-धीरे बनती है, जब पढ़ाई, अभ्यास और मार्गदर्शन का मेल होता है। पीडब्ल्यू स्किल्स के साथ दो-शिक्षक वाले मॉडल के ज़रिए, उद्योग के विशेषज्ञ और हमारे अपने शिक्षक तीन सेमेस्टर तक छात्रों के साथ मिलकर काम करेंगे, साथ ही उनकी पढ़ाई भी चलती रहेगी। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है: हर एमबीयू स्नातक पूरी तैयारी, आत्मविश्वास और योगदान देने की क्षमता के साथ कार्यस्थल में कदम रखे।”
फिज़िक्सवाला (पीडब्ल्यू) के सह-संस्थापक, अलख पांडे ने इस भागीदारी के बारे में कहा, “विश्विद्यालय की शिक्षा छात्रों को आवश्यक आधार प्रदान करती है, लेकिन रोज़गार की दुनिया में व्यावहारिक कौशल, आत्मविश्वास और सीखते रहने की क्षमता की भी ज़रूरत होती है। हम इस भागीदारी के ज़रिए, कॉलेज में रहते हुए ही छात्रों को उद्योग का अनुभव और व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करना चाहते हैं, ताकि वे आने वाले अवसरों के लिए आवश्यक कौशल हासिल कर सकें।”
मोहन बाबू यूनिवर्सिटी और फिज़िक्सवाला, इस गठजोड़ के ज़रिए ऐसा सफर तैयार करना चाहते हैं जहां छात्र शैक्षणिक ज्ञान और व्यावहारिक क्षमताएं एक साथ विकसित हो सकें, ताकि उन्हें उच्च शिक्षा से कार्यस्थल तक पहुंचने तक के बदलाव के लिए तैयार होने में मदद मिले।
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