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हिन्दुत्व में ही सबकी सुरक्षा की गारंटी है : संघ प्रमुख डॉ भागवत

मुंबई : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को मुंबई में कहा कि हिन्दुत्व में ही सबकी सुरक्षा की गारंटी है। भाषा, भूषा, खान-पान रीति रिवाज में भिन्नता के बावजूद हम राष्ट्र और संस्कृति से हिन्दू हैं।संघ प्रमुख डॉ. भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुंबई में आयोजित “नए क्षितिज” कार्यक्रम के दूसरे सत्र को संबोधित कर रहे थे।संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भाषा, भूषा, खान पान रीति रिवाज में भिन्नता के बावजूद हम राष्ट्र और संस्कृति से हिन्दू हैं, ऐसा कहने से आपको कुछ भी छोडऩा नहीं होगा और न ही आपकी पहचान संकट नहीं पैदा होगा। इसके लिए संवाद की आवश्यकता होती है। हिन्दू-मुस्लिम एक हैं, यह नारा ही गलत है। हम एक ही थे। वह भूल गए उसे याद दिलाने की आवश्यकता है। एक कालखंड में उन्होंने पूजा-पद्धति बदली, अब उसे छोड़ नहीं सकते। लेकिन अपना मूल याद कर अपनी संस्कृति के आधार पर जुड़ तो सकते हैं। संघ की शाखा में आकर एक घंटे शरीर मन बुद्धि से व्यायाम करना और शेष 23 घंटे अपनी सुविधा और सामथ्र्य के अनुसार अपने समाज के लिए कार्य करना ,यह भी एक मार्ग है। भारत अपने स्वत्व के आधार पर सब प्रकार से खड़ा हो, इसके लिए आप कुछ भी कर रहे हैं तो एक प्रकारसे आप संघ का ही कार्य कर रहे हैं। संघ के बारे में संघ को देखकर मन और मत बनाइये, यही मेरा आग्रह है। सही स्रोत से संघ को समझिए। संघ की शाखा, संघ के कार्यक्रम, संघ स्वयंसेवकों के आचरण और उनके घर से आपको संघ समझ में आएगा। तथ्यों के आधार पर यदि आप हमारा विरोध करेंगे तो भी हम आपका स्वागत करेंगे।सर संघचालक ने कहा कि ग्राम विकास, गोसेवा आदि सर्वमान्य कार्यों से व्यवस्था परिवर्तन भले न हो पर इससे समाज में परिवर्तन आता है। समाज की सज्जन शक्ति को अच्छी तरीके से सक्रिय होने की आवश्यकता है और सभी एक दूसरे के पूरक हों। समाज की सज्जन शक्ति की सक्रियता और उनके बीच समन्वय के लिए ही पंच परिवर्तन का अभियान है। सामाजिक समरसता अर्थात अपने समाज के बीच बिना किसी भेदभाव के अपने संचार के क्षेत्र में सम्पूर्ण हिन्दू समाज के सभी वर्गों में अपने एक मित्र होने चाहिए। इसके लिए अलग से कुछ खर्च नहीं लगता और अलग से अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता। अपने घर के निकट चर्मकार का कार्य करने वाला या आपका माली ही हो, उसके साथ अपने कुटुम्ब के सदस्यों के समान व्यवहार करना, इससे अपने आप संदेश जाएगा। बच्चों के भीतर परिवार के संस्कार, यह 12 वर्ष की आयु तक दिए जाते हैं तो यह जीवन भर प्रभावी होते हैं। वर्तमान समय में परिवार के सभी सदस्य मोबाइल में अधिक समय बिताते हैं। आवश्यकता है कि सप्ताह में एक दिन परिवार के साथ सामूहिक चर्चा करना, साथ ही भोजन करना। सभी को प्रामाणिकता और निस्वार्थ बुद्धि से अपने समाज की सेवा करना और उसकी चर्चा परिवार में करना, इसे मंगल संवाद कहते हैं। ऐसा करने से परिवार और समाज में बहुत सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा। अपने घर की चारदीवारी के बीच भाषा, भूषा, भजन, हवन, भोजन, भ्रमण अपना ही होना चाहिए। अपनी भाषा में हस्ताक्षर से ही शुरू करें। उसके लिए किसी दूसरी या विदेशी भाषा की आवश्यकता क्या है। पंच परिवर्तन की बात स्वयंसेवकों ने अपने घरों में शुरू कर दी है। यह एक दिन में नहीं होगा लेकिन यह एक दिन अवश्य होगा। हम सम्पूर्ण समाज को भी पंच परिवर्तन के विभिन्न आयामों को अपनाने का आग्रह करते हैं।