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उच्चस्तरीय संवाद में औद्योगिक विकास एवं एमएसएमई सशक्तिकरण पर हुई चर्चा

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है और निवेश के लिए एक विश्वसनीय एवं आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुका है। सरकार का उद्देश्य निवेश आकर्षण के साथ-साथ उद्योगों को एक स्थायी, सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण प्रदान करना है।

यह बात कहते हुए बुधवार को नंद गोपाल गुप्ता “नंदी” (औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री) ने लघु उद्योग भारती के साथ एक उच्चस्तरीय संवाद आयोजित किया। इस अवसर पर राकेश सचान (मंत्री, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्र) भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में आलोक कुमार (अपर मुख्य सचिव, औद्योगिक एवं अवस्थापना विकास, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, इन्वेस्ट यूपी) तथा प्रेरणा शर्मा (अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, इन्वेस्ट यूपी) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित रहे।

इस दौरान उत्तर प्रदेश में समग्र रूप से औद्योगिक विकास को गति देने, क्रियाशील एमएसएमई उद्योगों को सशक्त बनाने तथा औद्योगिक भूखंड आवंटन एवं औद्योगिक संचालन से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी एवं निवेशक-अनुकूल बनाने के विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। समीक्षा के अंतर्गत औद्योगिक भूखंड आवंटन प्रक्रिया में सुधार, रद्द किए गए भूखंडों के पुनः आवंटन, औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास, लीज रेंट एवं रखरखाव शुल्क की उचित व्यवस्था, स्टार्टअप्स एवं पुरानी औद्योगिक इकाइयों को प्राथमिकता, प्रदूषण नियंत्रण तथा लाइसेंसिंग प्रक्रिया के सरलीकरण जैसे विषय शामिल रहे।

इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया गया कि औद्योगिक भूखंड आवंटन से संबंधित अनावश्यक मुकदमेबाजी को न्यूनतम किए जाने तथा आवंटित भूमि का समयबद्ध एवं प्रभावी औद्योगिक/व्यावसायिक उपयोग सुनिश्चित किए जाने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

यह भी अवगत कराया गया कि सरदार वल्लभभाई पटेल योजना के अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक जनपद में 100 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। जहां प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर चरणबद्ध क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास किया जाएगा, जिससे सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को शीघ्र स्थापित होने में सुविधा प्राप्त होगी।

संवाद के दौरान लघु उद्योग भारती द्वारा सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से संबंधित विभिन्न नीतिगत सुझाव प्रस्तुत किए गए। इनमें उद्योग-हितैषी भूखंड आवंटन व्यवस्था, क्लस्टर आधारित विकास, प्लग-एंड-प्ले आधार पर शेड एवं फ्लैटेड फैक्ट्री की उपलब्धता, लीज शर्तों का सरलीकरण, वित्तीय संस्थानों से ऋण सुविधा, बुनियादी अवसंरचना, भवन मानचित्र स्वीकृति, उत्पादन प्रारंभ करने की समय-सीमा, कर एवं रखरखाव शुल्क में एकरूपता, एक्ज़िट/सरेंडर नीति तथा ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली जैसे विषय सम्मिलित रहे।

लघु उद्योग भारती ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि प्रदेश में कार्यरत पुरानी एमएसएमई इकाइयों को और अधिक प्रोत्साहित किए जाने, उन्हें सुदृढ़ बनाने तथा श्रेष्ठ औद्योगिक प्रथाओं को अपनाते हुए तकनीकी रूप से उन्नत किए जाने की आवश्यकता है, जिससे वे प्रतिस्पर्धात्मक रूप से अधिक सक्षम बन सकें।

इस दौरान यह स्पष्ट किया गया कि सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के हितों से जुड़े इन सभी विषयों पर राज्य सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है। यह भी अवगत कराया गया कि अनेक महत्वपूर्ण सुझावों को निवेश मित्र 3.0 के माध्यम से पहले ही संबोधित किया जा चुका है तथा शेष विषयों को आगामी चरणों में सम्मिलित किया जा रहा है, जिससे उद्योगों को समयबद्ध स्वीकृतियां, पारदर्शी प्रक्रियाएं एवं न्यूनतम अनुपालन सुनिश्चित हो सके।

समीक्षा में इस बात पर सहमति व्यक्त की गई कि औद्योगिक भूखंड आवंटन एवं औद्योगिक नीतियां उद्योगों के लिए व्यावहारिक, सरल एवं निष्पक्ष हों, ताकि सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों पर अनावश्यक वित्तीय एवं प्रशासनिक भार न पड़े और औद्योगिक गतिविधियों का सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

राकेश सचान ने भी एमएसएमई, खादी, ग्रामोद्योग, हथकरघा एवं वस्त्र क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने तथा उद्यमियों की समस्याओं के समाधान हेतु सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

अंत में यह दोहराया गया कि उद्योग संगठनों एवं सभी हितधारकों के सहयोग से उत्तर प्रदेश को औद्योगिक विकास, निवेश एवं रोजगार सृजन के क्षेत्र में देश का अग्रणी प्रदेश बनाया जाएगा।