लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। नेताजी सुभाष चंद्र बोस राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अलीगंज में लखनऊ की संस्कृति एवं सिनेमा विषय पर एक विचारोत्तेजक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. रोशन तक़ी उपस्थित रहे।
डॉ. तक़ी ने लखनवी तहज़ीब पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लखनऊ गंगा-जमुनी संस्कृति का गहना है और इसकी पहचान किसी एक धर्म या मज़हब से नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत से है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1775 के बाद देश के विभिन्न प्रांतों से आए लोगों ने लखनऊ की भाषा, साहित्य और संस्कृति को समृद्ध किया। रानी केतकी की कहानी और पद्मावत जैसी कृतियों ने अवध की ज़ुबान को मजबूत आधार दिया।
परिचर्चा में सिनेमा और लखनऊ के ऐतिहासिक रिश्ते पर चर्चा करते हुए डॉ. तक़ी ने कहा कि पहली बोलती फ़िल्म आलम आरा की कहानी लखनऊ से प्रेरित मानी जाती है। आन, अमर, मेरे महबूब, मेरे हुज़ूर, चौदहवीं का चाँद, उमराव जान और शतरंज के खिलाड़ी जैसी कालजयी फ़िल्मों में लखनऊ की तहज़ीब साफ़ झलकती है। उन्होंने बताया कि मुग़ले-आज़म के लेखक कमाल अमरोही ने फ़िल्म की भाषा को समझने के लिए लखनऊ में अध्ययन किया था।
कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा किया गया। परियोजना से जुड़ी प्रोफेसर श्वेता मिश्रा एवं डॉ. सनोबर हैदर ने परिचर्चा के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छात्राओं को लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।
महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर रश्मि बिश्नोई ने अतिथि का स्वागत करते हुए युवाओं से लखनऊ के इतिहास, कला और संस्कृति को समझने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. श्वेता मिश्रा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सनोबर हैदर द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
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