Friday , September 25 2026

पुकार

सिन्दूर मांग का मिटा दिया
बेटी को विधवा बना दिया
यह देख धधक कर जल उठा
हर नेत्र फफककर रो उठा
लेने को बदला दुश्मन से
एक राष्ट्रपिता अब जग उठा।
चीत्कार सुनी जब बेटी की
हर बाबुल का तन मन रोया
वीभत्स दृश्य को देख देख
भारत का हर बच्चा रोया
लेने को बदला बहन पिता का
इक भाई चैन से सो न सका
नापाक इरादे दुश्मन के
फिर आधी रात को जला दिए
एक बेटी के सिन्दूर की खातिर
जाने कितने दुश्मन फिर मिटा दिए।
देने को साथ बहन का फिर
सरहद पर हर भाई बैठा
और आसमान से बहनों ने
भारत का परचम लहराया
अब दहल उठा दिल दुश्मन का
और कांप उठी उसकी काया
जब लेने बदला बेटी का
पूरा भारत इक जुट आया
अब नहीं सहेंगे वार कोई
यह दुश्मन देश को धमकाया
लेने को हर वार का बदला
एक राष्ट्रपिता अब आगे आया।


निधि श्रीवास्तव